తెలుగు | Epaper

China: चीन नीति में भारत का बड़ा बदलाव

Dhanarekha
Dhanarekha
China: चीन नीति में भारत का बड़ा बदलाव

निवेश नियमों में संभावित ढील

नई दिल्ली: भारत(India) सरकार चीन(China) से जुड़े निवेश और खरीद प्रतिबंधों को ढीला करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। नई नीति के तहत निवेश का मूल्यांकन उसकी राष्ट्रीयता के बजाय आर्थिक प्रभाव के आधार पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य विदेशी पूंजी आकर्षित करना और घरेलू उद्योग को मजबूती देना है। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार सृजन होगा और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। यह बदलाव खासतौर पर कपड़ा और इंजीनियरिंग जैसे गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में लागू किया जाएगा।

नई दिल्ली(New Delhi) में नीति निर्माताओं के मुताबिक यह फैसला 2020 में सीमा विवाद के बाद लगाए गए सख्त नियमों को संतुलित करने की दिशा में कदम है। प्रेस नोट 3 के तहत भूमि सीमा वाले देशों से आने वाले एफडीआई पर कड़ी जांच होती थी। सरकार अब ऐसे क्षेत्रों में राहत देने पर विचार कर रही है जहां घरेलू उद्योग को तकनीक और पूंजी की जरूरत है। इससे निवेश माहौल बेहतर होने की उम्मीद है

प्रेस नोट 3 में संभावित बदलाव

प्रेस नोट 3 अप्रैल 2020 में लागू हुआ था ताकि संवेदनशील समय में अवसरवादी अधिग्रहण रोका जा सके। इस नियम के तहत चीन जैसे देशों से आने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी थी। अब सरकार इसे गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में आसान बनाने पर चर्चा कर रही है।

इस बदलाव से टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है। अधिकारियों का कहना है कि रोजगार और तकनीक हस्तांतरण करने वाले निवेश को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।

खरीद प्रतिबंधों में भी राहत संभव

सरकारी खरीद नियमों के तहत चीनी(China) कंपनियों की भागीदारी पर भी ढील दी जा सकती है। इसका मकसद रुकी हुई परियोजनाओं को दोबारा शुरू करना और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। उद्योग का मानना है कि इससे लागत कम होगी और परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी।

सरकार का तर्क है कि अगर सामान विदेश से आयात करना पड़ रहा है जबकि वह देश में बन सकता है तो इससे रोजगार का नुकसान होता है। ऐसे में नियंत्रित तरीके से निवेश को अनुमति देना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

कपड़ा उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि मैन-मेड फाइबर और विशेष धागों जैसे इनपुट के लिए चीन पर निर्भरता बनी हुई है। चीनी निवेश पर रोक से लागत बढ़ी है और सप्लाई में अनिश्चितता आई है। इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई है।

इंजीनियरिंग सेक्टर भी पूंजीगत वस्तुओं और इलेक्ट्रिक मशीनरी के लिए चीनी आयात पर काफी निर्भर है। हाल के आंकड़ों में इन आयातों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे यह साफ होता है कि उद्योग को वैकल्पिक स्रोतों की जरूरत है।

प्रतिबंधों से पैदा हुई चुनौतियां

चीनी निर्यात नियंत्रण और लाइसेंसिंग नियमों से भारत के हाई-टेक और क्लीन एनर्जी सेक्टर को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रेयर अर्थ मैग्नेट, बैटरी तकनीक और एडवांस मेटल इनपुट की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

उद्योग का कहना है कि इन चुनौतियों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और क्षमता विस्तार में देरी हो रही है। सरकार से आग्रह किया जा रहा है कि द्विपक्षीय बातचीत के जरिए इन समस्याओं का समाधान निकाला जाए।

निवेश नीति में बदलाव से क्या फायदा होगा

इससे विदेशी पूंजी आकर्षित होगी और घरेलू उद्योग को नई तकनीक मिलेगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उत्पादन क्षमता मजबूत होगी। साथ ही भारत वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर भूमिका निभा सकेगा।

सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में क्या रहेगा रुख

सरकार ने साफ किया है कि टेलीकॉम, रक्षा और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर में नियम सख्त ही रहेंगे। डेटा और संवेदनशील तकनीक की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। यहां किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

अन्य पढ़े:

📢 For Advertisement Booking: 98481 12870