स्पोर्ट्स डेस्क: टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की शानदार जीत के बाद रिंकू सिंह(Rinku Singh) ने अपने दिवंगत पिता खानचंद सिंह को याद करते हुए एक बेहद भावुक पोस्ट लिखा। रिंकू ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने पिता द्वारा सिखाए गए ‘फर्ज’ को अपना धर्म मानते हुए मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ(Best) दिया। उनके लिए यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि पिता के देखे हुए सपने को हकीकत में बदलने जैसा है।
फर्ज और परिवार के बीच का संघर्ष
रिंकू के पिता लंबे समय से स्टेज-4 लिवर कैंसर(Cancer) से जूझ रहे थे, जिसका दुखद अंत 27 फरवरी 2026 को हुआ। रिंकू(Rinku Singh) ने इस कठिन समय का जिक्र करते हुए लिखा कि पिता के बिना जीवन की कल्पना करना उनके लिए कितना मुश्किल है। वे टूर्नामेंट के दौरान अपने पिता से मिलने भी गए थे, लेकिन पिता का साथ छूटने के बाद भी उन्होंने देश के लिए अपना फर्ज निभाना जारी रखा।
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एक कठिन सफर का पड़ाव
2024 के वर्ल्ड कप में जगह न बना पाने से लेकर 2026 के विश्व कप विजेता बनने तक का रिंकू का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इस टूर्नामेंट में 5 मैच खेलने वाले रिंकू के लिए यह वर्ल्ड कप(Rinku Singh) न केवल उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह उनके पिता के प्रति एक भावभीनी श्रद्धांजलि भी है, जिन्हें उन्होंने अपना सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत माना है।
रिंकू सिंह के पिता का निधन कब और किस कारण से हुआ?
उनके पिता खानचंद सिंह का निधन 27 फरवरी 2026 को हुआ। वह लंबे समय से स्टेज-4 लिवर कैंसर से पीड़ित थे।
रिंकू सिंह ने अपने पोस्ट में ‘फर्ज’ के बारे में क्या कहा?
रिंकू ने कहा कि उनके पिता ने ही उन्हें सिखाया था कि ‘फर्ज सबसे आगे है’, इसलिए वे अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए मैदान पर पूरी निष्ठा के साथ अपना कर्तव्य निभाते रहे।
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