पीएमओ निर्देश से तेज हुई तैयारी
नई दिल्ली: सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कोल(COAL) इंडिया की आठ अनुषंगी कंपनियों को शेयर बाजार में उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है। नई दिल्ली(New Delhi) में इस संबंध में लिए गए फैसले के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय ने कोयला मंत्रालय को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2030 तक सभी सहायक इकाइयों की लिस्टिंग पूरी कराई जाए। इस कदम का उद्देश्य कॉरपोरेट प्रशासन को मजबूत बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना बताया जा रहा है।
उच्च स्तर पर लिए गए इस फैसले से कोल इंडिया(COAL INDIA) के कामकाज में व्यापक बदलाव की उम्मीद है। भारत(India) के घरेलू कोयला उत्पादन में कंपनी की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है, ऐसे में इसके सहायक उपक्रमों की बाजार में मौजूदगी से मूल्य सृजन को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सूचीबद्धता से बदलेगा प्रशासन ढांचा
सूत्रों के अनुसार आठों अनुषंगी कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से बाजार में लाने की योजना है। इससे न केवल वित्तीय जवाबदेही बढ़ेगी बल्कि निवेशकों की निगरानी भी मजबूत होगी। प्रशासनिक ढांचे को अधिक पेशेवर बनाने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
कंपनी की जिन इकाइयों को सूचीबद्ध किया जाना है, उनमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स, भारत कोकिंग कोल, सेंट्रल कोलफील्ड्स, वेस्टर्न कोलफील्ड्स, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स, महानदी कोलफील्ड्स और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट शामिल हैं। इससे कोयला क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की उम्मीद की जा रही है।
बीसीसीएल से होगी शुरुआत
सूत्रों का कहना है कि भारत कोकिंग कोल(COAL) लिमिटेड और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट को मार्च 2026 तक सूचीबद्ध करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इन दोनों कंपनियों के लिए जरूरी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोडशो भी आयोजित किए जा चुके हैं।
इसके अलावा अधिकारियों का मानना है कि शुरुआती लिस्टिंग से मिले अनुभव के आधार पर बाकी कंपनियों की प्रक्रिया और सुचारू बनाई जाएगी। बीसीसीएल की लिस्टिंग को पूरे कार्यक्रम की नींव माना जा रहा है, जिससे आगे की राह तय होगी। हालांकि समयसीमा का पालन सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
सहायक कंपनियों को बाजार में उतारने का उद्देश्य क्या है
इस कदम से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और परिसंपत्तियों के बेहतर मूल्यांकन का लक्ष्य रखा गया है। निवेशकों की भागीदारी से कंपनियों की कार्यक्षमता में सुधार की उम्मीद है। इससे सरकारी स्वामित्व वाली इकाइयों में जवाबदेही भी बढ़ेगी।
लिस्टिंग से कोयला क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा
शेयर बाजार में मौजूदगी से पूंजी जुटाने के नए अवसर खुलेंगे। परिचालन सुधार और तकनीकी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे दीर्घकाल में ऊर्जा क्षेत्र को स्थिरता मिल सकती है।
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