अब बैंकों की होगी जिम्मेदारी
नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 से, नई कारों, जीप और वैन के लिए फास्टैग(FAS Tag) लेते समय वाहन मालिकों को KYV (Know Your Vehicle) की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। NHAI ने यह साफ कर दिया है कि पुराने फास्टैग धारकों को भी अब रुटीन वेरिफिकेशन के लिए बार-बार चक्कर काटने या दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। इस बदलाव का उद्देश्य ग्राहकों के समय की बचत करना और टोल प्लाजा पर होने वाली तकनीकी रुकावटों को कम करना है।
डिजिटल ऑटोमेशन: बैंक अब खुद करेंगे डेटा का मिलान
अब फास्टैग को एक्टिवेट करने की पूरी जिम्मेदारी बैंकों पर होगी। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे वाहन पोर्टल के जरिए सीधे सरकारी डेटाबेस(FAS Tag) से वाहन की जानकारी वेरिफाई करें। यानी, अब ग्राहक को दस्तावेज देने के बजाय बैंक खुद ही डिजिटल रूप से पुष्टि करेंगे कि गाड़ी की जानकारी सही है या नहीं। यह प्रक्रिया न केवल पारदर्शी होगी, बल्कि टोल पेमेंट के अनुभव को भी ‘सीमलेस’ यानी बिना किसी रुकावट के पूरा करेगी।
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‘जरूरत आधारित’ जांच: अब सिर्फ शिकायत पर होगा वेरिफिकेशन
KYV की प्रक्रिया को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है, बल्कि इसे ‘नीड-बेस्ड’ (जरूरत आधारित) बना दिया गया है। इसका मतलब है कि सामान्य रूप से चल रहे फास्टैग(FAS Tag) के लिए कोई पूछताछ नहीं होगी। केवल तभी जांच की जाएगी जब किसी फास्टैग के गलत इस्तेमाल, अवैध तरीके से जारी होने या उसके खराब होने की शिकायत प्राप्त होगी। इससे आम जनता को बेवजह के वेरिफिकेशन संदेशों और ईमेल से छुटकारा मिल जाएगा।
क्या पुराने फास्टैग धारकों को अपने टैग के लिए कुछ करने की जरूरत है?
नहीं, अब पुराने फास्टैग(FAS Tag) धारकों को भी रुटीन KYV कराने की कोई जरूरत नहीं है। आपका फास्टैग पहले की तरह काम करता रहेगा और जब तक कोई विशेष शिकायत नहीं होती, आपसे दोबारा दस्तावेजों की मांग नहीं की जाएगी।
बैंकों द्वारा ‘प्री-एक्टिवेशन वैलिडेशन’ करने से ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहक को फास्टैग लेने के बाद वेरिफिकेशन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बैंक सरकारी पोर्टल से जानकारी पहले ही वेरिफाई कर लेंगे, जिससे टैग तुरंत एक्टिव हो जाएगा और टोल प्लाजा पर ब्लैकलिस्ट या इनवैलिड टैग जैसी समस्याएं नहीं आएंगी।
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