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Gig Workers: देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल

Dhanarekha
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Gig Workers: देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल

ओला, उबर और रैपिडो सेवाओं पर ब्रेक

नई दिल्ली: देशभर के लाखों एप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स शनिवार को हड़ताल पर हैं। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और IFAT के नेतृत्व में हो रहे इस विरोध का मुख्य कारण ड्राइवरों की घटती कमाई और कंपनियों द्वारा किया जा रहा कथित शोषण है। ड्राइवरों का आरोप है कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियां मनमाने तरीके से किराया तय कर रही हैं, जिससे ड्राइवरों को भारी नुकसान हो रहा है। साथ ही, बाइक टैक्सी सेवाओं को अवैध बताते हुए उन पर रोक लगाने की मांग भी की जा रही है

कानूनी मांग: बेस फेयर और सरकारी गाइडलाइंस

यूनियनों का कहना है कि ‘मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस-2025’ होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों ने अब तक न्यूनतम बेस फेयर को नोटिफाई नहीं किया है। इसकी वजह से एग्रीगेटर कंपनियां अपनी मर्जी से दाम कम कर रही हैं, जबकि गाड़ियों का रखरखाव और ईंधन जैसे सारा खर्च ड्राइवरों को उठाना पड़ता है। यूनियन नेता शेख सल्लाउद्दीन के अनुसार, गाइडलाइंस में किराया तय करने से पहले यूनियनों से परामर्श करना अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं हो रहा है।

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व्यापक असर: 35 लाख ड्राइवरों का समर्थन

इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में देखने को मिल रहा है, जहां लोग कैब और बाइक टैक्सी पर निर्भर हैं। देशभर में करीब 35 लाख ड्राइवर इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हैं। इससे पहले 31 दिसंबर को डिलीवरी वर्कर्स (स्विगी, जोमैटो) ने भी 10 मिनट की डिलीवरी और सामाजिक सुरक्षा की कमी को लेकर प्रदर्शन किया था। गिग वर्कर्स अब सरकार से ठोस नीति और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी मेहनत का उन्हें वाजिब हक मिल सके।

एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ ड्राइवरों की मुख्य शिकायतें क्या हैं?

ड्राइवरों की मुख्य शिकायतें न्यूनतम बेस फेयर तय न होना, कंपनियों द्वारा मनमाना कमीशन काटना, बाइक टैक्सी की अवैध संचालन और ऑपरेशनल जोखिम (तेल, सर्विसिंग) पूरी तरह ड्राइवर पर डालना हैं।

‘गिग वर्कर्स’ किन्हें कहा जाता है और उनकी सुरक्षा के लिए क्या मांगें हैं?

गिग वर्कर्स वे लोग हैं जो पारंपरिक नौकरी के बजाय स्वतंत्र रूप से एप-बेस्ड प्लेटफॉर्म्स (जैसे ओला, जोमैटो) के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। उनकी मांग है कि सरकार उनके लिए न्यूनतम वेतन, दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू करे।

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