10 महीने का उच्चतम स्तर
नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है, मार्च 2026 में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन(GST Collection) सालाना आधार पर 8.8% बढ़कर ₹2 लाख करोड़ के पार निकल गया है। यह पिछले 10 महीनों में सबसे अधिक संग्रह है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल (मार्च 2025) यह आंकड़ा ₹1.83 लाख करोड़ था। सरकार द्वारा रिफंड घटाने के बाद शुद्ध (Net) जीएसटी कलेक्शन भी 8.2% की वृद्धि के साथ ₹1.78 लाख करोड़ रहा, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और बेहतर टैक्स अनुपालन की ओर इशारा करता है।
वित्त वर्ष 2025-26 का शानदार प्रदर्शन
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो कुल ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन(GST Collection) साल-दर-साल 8.3% की बढ़त(Lead) के साथ ₹22.27 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। वहीं, नेट कलेक्शन ₹19.34 लाख करोड़ रहा। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रॉस कलेक्शन ₹20.25 लाख करोड़ दर्ज किया गया था। इस साल अप्रैल 2025 में अब तक का सबसे अधिक ₹2.37 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कलेक्शन हुआ था, जिसने भारतीय राजस्व इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया।
राजस्व के स्रोत और घरेलू मांग
कुल राजस्व में घरेलू स्रोतों (Gross Domestic Revenue) का योगदान ₹1.46 लाख करोड़ रहा, जिसमें सालाना 5.9% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, आयात से होने वाले राजस्व (Gross Import Revenue) में 17.8% की भारी उछाल देखी गई, जो ₹0.54 लाख करोड़ रही। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी कलेक्शन में यह निरंतर वृद्धि दर्शाती है कि उपभोक्ता मांग और औद्योगिक उत्पादन दोनों ही पटरी पर हैं। जुलाई 2017 में लागू होने के बाद से जीएसटी ने देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सुव्यवस्थित करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
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जीएसटी कलेक्शन का ज्यादा होना अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत देता है?
जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि देश की अर्थव्यवस्था तंदुरुस्त है। इसका मतलब है कि लोग अधिक खरीदारी कर रहे हैं, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ रहा है और करदाता अधिक ईमानदारी से टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीएसटी संग्रह कितना रहा?
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन ₹22.27 लाख करोड़ से ज्यादा रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8.3% अधिक है।
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