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India: भारत-EU व्यापारिक क्रांति: 18 साल बाद हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

Dhanarekha
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India: भारत-EU व्यापारिक क्रांति: 18 साल बाद हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

सस्ती होंगी लग्जरी कारें और शराब

नई दिल्ली: भारत(India) और 27 यूरोपीय देशों के बीच मंगलवार को एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के तहत आयातित यूरोपीय लग्जरी कारों (जैसे BMW और मर्सिडीज) पर लगने वाली 110% ड्यूटी अब घटकर मात्र 10% रह जाएगी। हालांकि, इसके लिए सरकार ने सालाना 2.5 लाख गाड़ियों की सीमा तय की है। इसके अलावा, प्रीमियम यूरोपीय शराब और वाइन पर लगने वाला 150% टैक्स भी घटकर 20% होने की उम्मीद है, जिससे ये उत्पाद भारतीय बाजारों में काफी सस्ते हो जाएंगे

वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘साझा समृद्धि का रोडमैप’ बताते हुए कहा कि यह समझौता वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती प्रदान करेगा। भारत(India) (दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था) और यूरोपीय संघ (दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था) मिलकर दुनिया की 25% जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस डील के जरिए ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEA) को भी गति मिलेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।

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रोजगार के अवसर और आर्थिक लाभ

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के अनुसार, इस समझौते से हर साल लगभग ₹43 हजार करोड़ के टैरिफ कम होंगे। इससे(India) न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि भारत और यूरोप दोनों क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे। यह डील ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर में ‘ग्रीनलैंड विवाद’ और अन्य ट्रेड वॉर के कारण अस्थिरता है, ऐसे में भारत-EU का यह कदम आपसी सहयोग का एक सशक्त संदेश है।

क्या इस समझौते के बाद भारत में बिकने वाली सभी BMW और मर्सिडीज कारें सस्ती हो जाएंगी?

नहीं, सभी कारें सस्ती नहीं होंगी। मर्सिडीज और BMW की जो कारें भारत में पहले से ही असेंबल (CKD) होती हैं, उन पर पहले से ही कम टैक्स लगता है। इस डील का बड़ा फायदा उन प्रीमियम और लग्जरी मॉडल्स को मिलेगा जिन्हें पूरी तरह से विदेश से आयात (CBU) किया जाता है, क्योंकि उनकी ड्यूटी 110% से घटकर 10% हो जाएगी।

भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से आम भारतीय निर्यातकों को क्या फायदा होगा?

इस समझौते से भारतीय(India) कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), और कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बिना किसी भारी टैक्स के पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

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