चिप सेक्टर में महाशक्ति बनने की ओर कदम
नई दिल्ली: ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के अंतिम दिन भारत(India) आधिकारिक तौर पर ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन का हिस्सा बन गया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सेमीकंडक्टर और एआई (AI) की सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और चीन जैसे गैर-मित्र देशों पर निर्भरता कम करना है। इस गठबंधन में भारत के साथ अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। इसका लक्ष्य कच्चे माल से लेकर एडवांस इंफ्रास्ट्रक्चर तक एक भरोसेमंद इकोसिस्टम तैयार करना है।
10 लाख नौकरियां और ‘2-नैनोमीटर’ चिप का सपना
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत में जल्द ही चिप का कॉमर्शियल उत्पादन शुरू हो जाएगा। सबसे गर्व की बात यह है कि भारतीय इंजीनियर(Engineer) अब देश में ही अत्यंत उन्नत ‘2-नैनोमीटर’ चिप डिजाइन कर रहे हैं। इस बढ़ते सेमीकंडक्टर उद्योग को आने वाले समय(India) में लगभग 10 लाख स्किल्ड प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी। भारत अपनी इंजीनियरिंग प्रतिभा के दम पर दुनिया की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए तैयार है और अगले दो वर्षों में इस क्षेत्र में 200 बिलियन डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है।
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मोदी-ट्रम्प मुलाकात और वैश्विक साझेदारी
इस समिट में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भारत की भूमिका को “रणनीतिक रूप से अनिवार्य” बताया। जहाँ सुंदर पिचाई ने भरोसेमंद(India) सप्लाई चेन और बिजनेस के नए रास्तों पर जोर दिया, वहीं सर्जियो गोर ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात जल्द ही हो सकती है। यह साझेदारी न केवल तकनीक बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी भारत और अमेरिका के रिश्तों को एक नई ऊँचाई प्रदान करेगी।
‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) समझौता भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह समझौता भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का एक प्रमुख हिस्सा बनाता है। इससे भारत को उन्नत तकनीक तक पहुँच मिलेगी, विदेशी निवेश बढ़ेगा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी, जिससे देश की आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा मजबूत होगी।
क्या भारत में वास्तव में चिप का निर्माण शुरू हो गया है?
सरकार के अनुसार, भारत में वर्तमान में 10 सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर काम चल रहा है। जल्द ही देश के पहले प्लांट में चिप का कॉमर्शियल प्रोडक्शन (व्यावसायिक उत्पादन) शुरू होने वाला है, जिससे भारत मोबाइल और कंप्यूटर चिप्स के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।
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