भविष्य की तकनीक और समावेशी विकास पर पीएम मोदी का जोर
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत(Innovation-driven India) अब केवल पारंपरिक विकास की राह पर नहीं, बल्कि एक ‘इनोवेशन-ड्रिवन’ अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने भविष्य की जरूरतों को समझते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन, डिजिटल इकोनॉमी और डिजाइन-बेस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों को आर्थिक विकास का इंजन बताया है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य अपने एजुकेशन सिस्टम को वैश्विक मानकों और रियल-वर्ल्ड इकोनॉमी की वास्तविक जरूरतों के साथ जोड़ना है ताकि युवा पीढ़ी ‘फ्यूचर रेडी’ बन सके।
शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास का मिशन
सरकार की प्राथमिकता केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि ‘सबका साथ सबका विकास’ की भावना के साथ समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना है। शिक्षा और रोजगार(Employment) के बीच की दूरी को पाटने के लिए विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों पर(Innovation-driven India) ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसके साथ ही, बेटियों के सशक्तिकरण के लिए हर जिले में हॉस्टल बनाने और हेल्थकेयर को ‘प्रिवेंटिव’ और ‘होलिस्टिक’ (समग्र) बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। खेल को भी राष्ट्रीय विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में पहचान दी जा रही है।
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बजट घोषणाओं का क्रियान्वयन और भविष्य की राह
वेबिनार का मुख्य उद्देश्य 1 फरवरी को पेश किए गए बजट के प्रावधानों को धरातल पर उतारने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना है। बजट में डिफेंस बजट में 15.2% की भारी बढ़ोतरी, कैंसर और अन्य दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर आयात(Innovation-driven India) शुल्क हटाना, और 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी घोषणाएं देश के बुनियादी ढांचे को नई गति देंगी। विशेषज्ञों और इंडस्ट्री लीडर्स के साथ मिलकर इन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि भारत की विकास दर को और अधिक समावेशी और तेज बनाया जा सके।
पीएम मोदी ने एजुकेशन सिस्टम में किस बड़े बदलाव पर जोर दिया है?
पीएम मोदी ने शिक्षा और रोजगार के बीच सीधे संबंध पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि हमें अपने एजुकेशन सिस्टम को ‘रियल-वर्ल्ड इकोनॉमी’ और ‘फ्यूचर रेडी स्किल्स’ के साथ जोड़ना होगा ताकि विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें।
सरकार ने बेटियों के सशक्तिकरण के लिए बजट में क्या विशेष घोषणा की है?
सरकार ने समावेशी विकास के तहत देश के लगभग 800 जिलों में लड़कियों के लिए विशेष हॉस्टल बनाने की घोषणा की है, ताकि शिक्षा और अवसरों की कमी के कारण कोई भी बेटी पीछे न छूटे।
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