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IPO: रिलायंस जियो का मेगा IPO

Author Icon By Dhanarekha
Updated: April 18, 2026 • 2:03 PM
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मई में फाइल हो सकते हैं ड्राफ्ट पेपर्स, बनेगा देश का सबसे बड़ा इश्यू

मुंबई: रिलायंस जियो अपना बहुप्रतीक्षित IPO लाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी मई महीने में इसके लिए ड्राफ्ट पेपर्स (DRHP) फाइल कर सकती है। हालांकि, पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार रिलायंस मार्च के अंत तक ही पेपर्स फाइल करना चाहती थी, लेकिन ईरान युद्ध के चलते बाजार में आई अस्थिरता और गिरावट की वजह से इस टाइमलाइन को आगे बढ़ाना पड़ा। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भी पिछले वर्ष संकेत दिए थे कि जियो की लिस्टिंग 2026 की पहली छमाही में होने की पूरी संभावना है

वैल्यूएशन में कीर्तिमान और निवेशकों के लिए अवसर

जियो की वैल्यूएशन नए ऊंचाइयों को छू रही है। इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने पिछले साल इसकी वैल्यूएशन 180 बिलियन डॉलर आंकी थी, जो अब बढ़कर 240 बिलियन डॉलर (लगभग 22 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गई है। यदि कंपनी अपनी कुल हिस्सेदारी का मात्र 2.5% भी बाजार में लाती है, तो यह हुंडई मोटर इंडिया के 27,000 करोड़ रुपये के IPO के रिकॉर्ड को तोड़कर भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन जाएगा। यह IPO उन बड़े ग्लोबल निवेशकों जैसे KKR, सिल्वर लेक और गूगल के लिए भी एक बड़ा अवसर होगा, जो पिछले छह वर्षों में इसमें निवेश कर मुनाफा कमाने का इंतजार कर रहे हैं।

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भविष्य की राह: AI और सैटेलाइट इंटरनेट का मुकाबला

जियो अब केवल एक टेलीकॉम कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं में भी एक दिग्गज बनने की ओर अग्रसर है। एनवीडिया के साथ साझेदारी कर कंपनी अपना AI इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रही है। इसके साथ ही, बाजार में रिलायंस जियो की सीधी टक्कर इलॉन मस्क की स्टारलिंक के साथ होने वाली है, जो जल्द ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की योजना बना रही है। IPO को मैनेज करने के लिए कंपनी ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली और सिटीग्रुप समेत 19 प्रमुख बैंकों को एडवाइजर के तौर पर नियुक्त किया है, जो इसकी तैयारियों को धार दे रहे हैं।

DRHP (Draft Red Herring Prospectus) क्या होता है और इसकी क्या भूमिका है?

DRHP एक प्रारंभिक कानूनी दस्तावेज होता है जिसे कंपनी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को जमा करती है। इसमें कंपनी के बिजनेस मॉडल, उसके प्रमोटर्स, वित्तीय स्थिति, जोखिमों और IPO से जुड़े उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी होती है। SEBI द्वारा इस दस्तावेज की गहन जांच और मंजूरी के बाद ही कंपनी पब्लिक इश्यू (IPO) लेकर आती है।

जियो का यह IPO भारत के अन्य IPO से इतना बड़ा क्यों माना जा रहा है?

विशेषज्ञों के अनुसार, जियो की वर्तमान वैल्यूएशन करीब 240 बिलियन डॉलर (22 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है। इस विशाल वैल्यूएशन के कारण यदि कंपनी अपनी हिस्सेदारी का छोटा हिस्सा (जैसे 2.5%) भी बाजार में बेचती है, तो जुटाई जाने वाली राशि हुंडई मोटर इंडिया के 27,000 करोड़ रुपये के पिछले सबसे बड़े IPO के आंकड़े को आसानी से पीछे छोड़ देगी।

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