क्रूड ऑयल में भारी गिरावट और बाजार की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली: ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग को व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने के ऐतिहासिक निर्णय(Historical Decision) के बाद वैश्विक बाजार(Global Economy) में सकारात्मक हलचल है। शुक्रवार, 17 अप्रैल को कच्चा तेल 13% गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो एक दिन पहले 99.39 डॉलर था। जंग के दौरान यह कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गई थीं। इस खबर का असर शेयर बाजार पर भी दिखा और अमेरिका का डाउ जोन्स करीब 1,000 अंक की तेजी के साथ 49,500 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प(Donald Trump) ने भी इसे शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि होर्मुज का इस्तेमाल अब दुनिया के खिलाफ हथियार के रूप में नहीं होगा।
भारत के लिए राहत: महंगाई और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर
भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 85% आयात करता है, जिसमें से 51% हिस्सा अकेले खाड़ी देशों से आता है। तेल कीमतों में आई यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई तरह से फायदेमंद है:
महंगाई पर लगाम: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि की आशंका खत्म होने से ट्रांसपोर्ट लागत स्थिर रहेगी, जिससे फल, सब्जी और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम नहीं बढ़ेंगे।
आर्थिक मजबूती: इंपोर्ट बिल घटने से चालू खाता घाटा (CAD) कम होगा, विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और रुपए को मजबूती मिलेगी।
राजकोषीय लाभ: सरकार का सब्सिडी बिल कम होगा, जिससे बचा हुआ पैसा इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याणकारी योजनाओं में खर्च किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल 10 डॉलर सस्ता होने पर महंगाई में करीब 0.5% की राहत मिल सकती है।
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वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और तनाव का अंत
होर्मुज जलमार्ग से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। इस रूट के बंद होने से न केवल कच्चा तेल महंगा हुआ था, बल्कि प्लास्टिक, उर्वरक और एल्युमीनियम जैसे जरूरी सामानों की आपूर्ति भी बाधित हो गई थी। इससे वैश्विक स्तर पर शिपिंग लागत कई गुना बढ़ गई थी और यूरोप-ब्रिटेन जैसे देशों में दवाओं की किल्लत जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। अब इस मार्ग के खुलने से सप्लाई चेन सामान्य होगी और वैश्विक एनर्जी मार्केट में स्थिरता लौटेगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी के जोखिम से बाहर निकलने में मदद मिलेगी।
होर्मुज रूट खुलने से भारत के ‘चालू खाता घाटा’ (CAD) पर क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा?
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत का ‘इंपोर्ट बिल’ कम हो जाएगा। कम डॉलर खर्च होने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) में कमी आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल 10 डॉलर सस्ता होने पर CAD में 9-10 बिलियन डॉलर की कमी आ सकती है।
होर्मुज रूट बंद होने से आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ा था?
होर्मुज रूट के बंद होने से कच्चे तेल के साथ-साथ एलपीजी, प्लास्टिक और उर्वरक जैसी जरूरी चीजें महंगी हो गई थीं। इसके कारण माल ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) का खर्च बढ़ गया, जिससे फल, सब्जियां और अनाज जैसी रोजमर्रा की खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ गए थे, जिससे आम आदमी का मासिक बजट बिगड़ गया था।
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