नहीं बढ़ेगा घरेलू उड़ानों का भारी किराया
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 100% से ज्यादा के उछाल(Jet Fuel) के बावजूद, भारत सरकार ने घरेलू हवाई यात्रियों को बड़ी राहत दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एयरलाइन कंपनियों के लिए एविशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी को अधिकतम 25% तक सीमित (Cap) रखने का फैसला किया है। दिल्ली में अब ATF की कीमत ₹1,04,927 प्रति किलोलीटर तय की गई है। यदि सरकार यह कदम नहीं उठाती, तो ईंधन के दाम दोगुने से भी अधिक हो सकते थे, जिससे आम आदमी के लिए हवाई सफर करना लगभग नामुमकिन हो जाता।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज संकट और वैश्विक प्रभाव
वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई इस अस्थिरता का मुख्य कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) का बंद होना है। इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव(Jet Fuel) के कारण यह महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता ब्लॉक हो गया है, जहाँ से दुनिया के कच्चे तेल की बड़ी सप्लाई होती है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। आपूर्ति बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन सरकार ने ‘स्टैगर्ड’ (किस्तवार) तरीके से दाम बढ़ाने की नीति अपनाई है ताकि भारतीय बाजार पर इसका अचानक बोझ न पड़े।
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घरेलू बनाम अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 25% की यह राहत सीमा केवल घरेलू उड़ानों (Domestic Flights) के लिए ही लागू होगी। अंतरराष्ट्रीय रूट पर चलने वाली फ्लाइट्स को वैश्विक बाजार की बढ़ी हुई कीमतों के अनुसार ही भुगतान करना होगा। चूंकि किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40% हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है, इसलिए इस फैसले से घरेलू टिकटों के दाम नियंत्रण में रहेंगे। हालांकि, 25% की सीमा के भीतर मामूली बढ़ोतरी के कारण टिकट की कीमतों में थोड़ा इजाफा देखा जा सकता है, लेकिन यह ‘अचानक उछाल’ जैसा नहीं होगा।
सरकार ने ATF की कीमतों में बढ़ोतरी पर 25% का कैप क्यों लगाया है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन के दाम 100% से ज्यादा बढ़ गए हैं। घरेलू हवाई किराए को आम जनता की पहुंच में रखने और एयरलाइंस पर अचानक पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करने के लिए सरकार ने इस बढ़ोतरी को 25% तक सीमित कर दिया है।
क्या इस फैसले से विदेश जाने वाली उड़ानों का किराया भी कम रहेगा?
नहीं, यह राहत केवल घरेलू उड़ानों के लिए है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को जेट फ्यूल के लिए वही वैश्विक रेट देने होंगे जो दुनिया के बाकी हिस्सों में चल रहे हैं, इसलिए विदेशी यात्रा के टिकट महंगे हो सकते हैं।
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