नई दिल्ली: वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनावों के कारण भारत(India) में एलपीजी आपूर्ति(LPG Crisis) प्रभावित हुई है, जिससे कई राज्यों में आम उपभोक्ताओं से लेकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ स्थिति का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
संकट के प्रमुख कारण: वैश्विक भू-राजनीति
भारत में गैस किल्लत के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं। पहला, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का लगभग बंद होना, जो वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग(LPG Crisis) है और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। दूसरा, कतर में स्थित एलएनजी प्लांट पर हालिया ड्रोन हमले के कारण उत्पादन में आई रुकावट है, जिससे भारत की गैस आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ा है।
सरकार द्वारा उठाए गए आपातकालीन कदम
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके। पेट्रोलियम मंत्रालय(LPG Crisis) ने तीन प्रमुख तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाई है, जो निरंतर सप्लाई की समीक्षा कर रही है। साथ ही, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग के नियमों में बदलाव करते हुए 25 दिनों की अनिवार्य अवधि तय की गई है और डिलीवरी के समय ओटीपी (OTP) अनिवार्य कर दिया गया है।
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उपभोक्ताओं के लिए स्थिति और समाधान
फिलहाल देश भर में आम नागरिक गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, जबकि कई राज्यों में रेस्टोरेंट्स को कॉमर्शियल गैस न मिलने से व्यावसायिक कामकाज ठप है। हालांकि, इंडियन ऑयल के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग न करें। सरकार अब अमेरिका, रूस और अल्जीरिया जैसे वैकल्पिक देशों से ऊर्जा कार्गो मंगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है ताकि जल्द से जल्द आपूर्ति सामान्य हो सके।
घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में क्या बदलाव आया है?
सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद, उपभोक्ता अगला सिलेंडर केवल 25 दिनों के बाद ही बुक कर पाएंगे।
क्या उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत है?
तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि ग्राहकों को घबराने (Panic Booking) की जरूरत नहीं है। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
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