रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी पर संकट
नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका तनाव के कारण भारत में कमर्शियल LPG की भारी किल्लत हो गई है, जिसका सीधा असर फूड इंडस्ट्री पर पड़ा है। स्विगी और जोमैटो(Zomato) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर की संख्या में 60% तक की गिरावट आई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि जिन डिलीवरी पार्टनर्स को दिन में 30 ऑर्डर मिलते थे, वे अब केवल 5-10 ऑर्डर पर सिमट गए हैं। गैस बचाने के लिए रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू से रोटी, डोसा और पूरी जैसे ज्यादा ईंधन खपत वाले व्यंजनों को हटा दिया है, जिससे ग्राहकों का अनुभव भी प्रभावित हो रहा है।
गिग वर्कर्स की आर्थिक स्थिति और माँगें
काम की कमी ने डिलीवरी पार्टनर्स(Delivery Partners) के सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है। इसे देखते हुए ‘गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ ने सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। यूनियन की मुख्य माँगों में प्रभावित वर्कर्स को ₹10,000 की तत्काल आर्थिक सहायता, आईडी डिएक्टिवेशन पर 3 महीने की रोक और एक निश्चित न्यूनतम आय की गारंटी शामिल है। वे चाहते हैं कि सरकार क्लाउड किचन और राइड-हेलिंग ड्राइवरों के लिए भी एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे।
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कॉरपोरेट जगत और भविष्य की चुनौतियाँ
इस संकट की आंच अब कॉरपोरेट ऑफिसों और आईटी कंपनियों तक भी पहुँच गई है। इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से टिफिन लाने की सलाह दी है क्योंकि उनके कैम्पस की कैंटीन में गैस की कमी के कारण सीमित मेन्यू ही उपलब्ध है। चूँकि देश की प्रमुख क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) चेन अपनी 65% कुकिंग के लिए LPG पर निर्भर हैं, इसलिए सप्लाई चेन में सुधार न होने पर आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।
रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू में कटौती क्यों की है?
कमर्शियल गैस की किल्लत के कारण रेस्टोरेंट्स उन व्यंजनों को नहीं बना पा रहे हैं जिनमें गैस की खपत अधिक होती है, जैसे रोटी, डोसा और पूरी। गैस बचाने और सीमित स्टॉक में काम चलाने के लिए उन्होंने अपना मेन्यू छोटा कर दिया है।
LPG संकट का आईटी कंपनियों के कामकाज पर क्या असर पड़ा है?
इंफोसिस जैसी आईटी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर जानकारी दी है कि गैस की कमी के कारण कैंटीन सेवाएँ प्रभावित हैं। कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से खाना लाने या बाहरी सेंट्रल किचन से मगाए गए सीमित भोजन पर निर्भर रहने की सलाह दी है।
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