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LPG: एलपीजी सब्सिडी फॉर्मूले में बड़ा बदलाव

Dhanarekha
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LPG: एलपीजी सब्सिडी फॉर्मूले में बड़ा बदलाव

अमेरिका आधारित कीमतों से बदलेगा हिसाब

नई दिल्ली: सरकार एलपीजी(LPG) सब्सिडी की गणना के तरीके में बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिका(USA) के निर्यातकों के साथ सालाना आपूर्ति अनुबंध किए हैं। अभी तक सब्सिडी का आधार सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस रहा है, जो पश्चिम एशिया से आने वाली गैस की कीमतों को दर्शाता है।

नए समझौतों के बाद तेल कंपनियां चाहती हैं कि सब्सिडी निर्धारण में अमेरिकी बेंचमार्क और लंबी दूरी की शिपिंग लागत को भी जोड़ा जाए। हालांकि इससे मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है। सऊदी अरब(Saudi Arabia) से तुलना करने पर भारत तक अमेरिकी एलपीजी की ढुलाई कहीं अधिक महंगी पड़ती है, जिसका असर सरकारी खर्च पर दिख सकता है

आयात सौदे और सब्सिडी गणना

तेल कंपनियों के अनुसार अमेरिका से एलपीजी(LPG) तभी किफायती साबित होती है, जब कीमत में इतनी छूट मिले कि भारी फ्रेट लागत की भरपाई हो सके। अमेरिकी शिपमेंट की ढुलाई लागत सऊदी आपूर्ति की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा मानी जाती है।

सरकारी कंपनियों ने पहली बार अमेरिका से दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए अनुबंध किया है। यह सौदा सालाना 22 लाख मीट्रिक टन एलपीजी(LPG) आयात से जुड़ा है, जो देश के कुल आयात का अहम हिस्सा बनता है। इससे पहले अमेरिकी गैस केवल स्पॉट मार्केट से खरीदी जाती थी।

घरेलू कीमतों पर संभावित असर

सरकार यह तय करती है कि घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी(LPG) किस दर पर मिलेगी। जब बाजार कीमतें ज्यादा होती हैं और कंपनियां घाटे में बिक्री करती हैं, तब सब्सिडी से भरपाई होती है। नए फॉर्मूले से यह गणना बदल सकती है।

इसके अलावा सब्सिडी का बोझ बढ़ने या घटने का असर सीधे बजट और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। यदि अमेरिकी आयात महंगा साबित हुआ, तो सरकार को या तो ज्यादा भुगतान करना होगा या कीमतों में संशोधन करना पड़ सकता है।

मौजूदा दरें और निर्भरता

दिल्ली में घरेलू 14.2 किलो का एलपीजी सिलेंडर फिलहाल 853 रुपये में मिल रहा है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सहायता दी जाती है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें हर महीने तय होती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित रहती हैं। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिससे वैश्विक कीमतों का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।

एलपीजी सब्सिडी का फॉर्मूला क्यों बदला जा रहा है

नए अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति समझौतों के कारण लागत संरचना बदल गई है। अमेरिकी आयात में शिपिंग खर्च ज्यादा है। इसी वजह से सब्सिडी की गणना को यथार्थवादी बनाने पर विचार हो रहा है।

उपभोक्ताओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है

यदि सब्सिडी गणना बदली जाती है तो घरेलू कीमतों में बदलाव संभव है। कुछ मामलों में राहत मिल सकती है। वहीं लंबे समय में सरकार की नीति तय करेगी कि बोझ किस पर पड़ेगा।

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