गैस और ईंधन: कहीं राहत, कहीं बोझ
नई दिल्ली: साल 2026(New Year) के पहले ही दिन आम आदमी की जेब पर मिला-जुला असर पड़ा है। एक ओर कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹111 का भारी इजाफा हुआ है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत ₹1691.50 तक पहुँच गई है। यह वृद्धि बाहर खाना खाने और कैटरिंग सेवाओं को महंगा कर सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस के दाम स्थिर हैं। साथ ही, CNG और PNG की कीमतों में ₹2-3 प्रति यूनिट की कटौती की गई है, जिससे वाहन चालकों और पाइप गैस इस्तेमाल करने वाले परिवारों को लाभ मिलेगा।
परिवहन और यात्रा: कारें महंगी, हवाई सफर सस्ता
अगर आप नई कार खरीदने का मन बना रहे हैं, तो अब आपको ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। हुंडई, मर्सिडीज और MG मोटर जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपनी कारों की कीमतों में 2% से 3% तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके विपरीत, हवाई यात्रियों(New Year) के लिए अच्छी खबर है; तेल कंपनियों ने एविएशन फ्यूल (ATF) के दाम करीब ₹7,000 प्रति किलोलीटर घटा दिए हैं। इससे आने वाले दिनों में फ्लाइट टिकट के दाम कम होने की पूरी उम्मीद है। इसके अलावा, रेलवे ने फर्जी बुकिंग रोकने के लिए 12 जनवरी से आधार लिंक करना अनिवार्य कर दिया है।
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8वां वेतन आयोग: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी सौगात
नए साल का सबसे बड़ा धमाका केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग को लागू करने का ऐलान है। हालांकि इसकी सटीक समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि यह जनवरी 2026 से ही प्रभावी हो सकता है। इस बदलाव से केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, डीए (DA) और पेंशन में भारी वृद्धि होगी। अनुमान के मुताबिक, जिनकी वर्तमान सैलरी ₹65,500 के आसपास है, नए आयोग के तहत वह बढ़कर ₹1.10 लाख के पार पहुँच सकती है, जिससे लाखों कर्मचारियों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
रेलवे ने टिकट बुकिंग के लिए आधार लिंक करना क्यों जरूरी किया है?
रेलवे का मुख्य उद्देश्य ओपनिंग डे (60 दिन पहले वाली बुकिंग) पर होने वाली फर्जी और थोक बुकिंग को रोकना है। आधार लिंक होने से केवल असली(New Year) यात्री ही सुबह के समय टिकट बुक कर सकेंगे, जिससे आम जनता को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
कार कंपनियों ने नए साल में कीमतें क्यों बढ़ाई हैं?
कार कंपनियों के अनुसार, निर्माण में लगने वाली सामग्री (इनपुट कॉस्ट), लॉजिस्टिक्स खर्च और विदेशी मुद्रा (करेंसी) के उतार-चढ़ाव(New Year) के कारण कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था। ज्यादातर कंपनियों ने 0.6% से लेकर 3% तक की बढ़ोतरी की है।
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