निवेश और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
नई दिल्ली: भारतीय बाजार में सोने का ₹1.76 लाख और चांदी(Precious Metal) का ₹3.86 लाख के पार पहुंचना एक ऐतिहासिक घटना है। इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा हाथ वैश्विक अस्थिरता और ‘ग्रीनलैंड’ विवाद जैसे भू-राजनीतिक तनावों का है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेड वॉर या टैरिफ की धमकियां (जैसा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा देखी जा रही हैं) बढ़ती हैं, निवेशक शेयर बाजार के बजाय सोने को एक ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के रूप में चुनते हैं। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की ₹91.10 की रिकॉर्ड कमजोरी ने भारत में सोने की लैंडिंग कॉस्ट(Landing Cost) को काफी बढ़ा दिया है।
औद्योगिक मांग और सेंट्रल बैंकों की रणनीति
चांदी की कीमतों में आई भारी तेजी केवल निवेश के कारण नहीं, बल्कि इसकी बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड की वजह से भी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल होना इसे अब केवल ज्वेलरी(Precious Metal) तक सीमित नहीं रहने दे रहा। साथ ही, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सोने का स्टॉक बढ़ा रहे हैं। सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा होने का यह असंतुलन कीमतों को लगातार नए शिखर की ओर धकेल रहा है, जिससे आम खरीदार के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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खरीदारों के लिए सावधानी और भविष्य का अनुमान
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ, तो सोना जल्द ही ₹1.90 लाख के स्तर को छू सकता है। ऐसे में आम जनता को सोना खरीदते(Precious Metal) समय बेहद सतर्क रहना चाहिए। हमेशा BIS हॉलमार्क (HUID) की जांच करें और 24, 22 या 18 कैरेट के बीच के अंतर को समझकर ही पैसे चुकाएं। चांदी की शुद्धता जांचने के लिए मैग्नेट और आइस टेस्ट जैसे घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं। बढ़ती कीमतों के इस दौर में किसी भी बड़े निवेश से पहले मार्केट ट्रेंड्स और मेकिंग चार्जेस का बारीकी से मिलान करना समझदारी होगी।
भारत में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में इतनी अधिक क्यों दिख रही हैं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव डॉलर में तय होता है, लेकिन भारत में इसकी कीमत डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट और आयात शुल्क(Precious Metal) पर निर्भर करती है। वर्तमान में रुपया डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर (₹91.10) पर है, जिससे विदेश से सोना खरीदना महंगा हो गया है। इसके अलावा, इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के रेट्स में 3% GST और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते। जब ज्वेलर्स इसे बेचते हैं, तो इन करों और अपने मुनाफे को जोड़ने के बाद खुदरा कीमत ₹1.76 लाख जैसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाती है।
क्या मौजूदा उच्च स्तर पर चांदी में निवेश करना सोने से बेहतर विकल्प है?
चांदी को अक्सर “गरीबों का सोना” कहा जाता है, लेकिन 2026 की शुरुआत में इसकी ग्रोथ सोने से भी तेज रही है। इसका मुख्य कारण औद्योगिक मांग है। सोलर पैनल, 5G तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जहाँ सोना एक ‘सुरक्षित संपत्ति’ है जो आपकी पूंजी की रक्षा करता है, वहीं चांदी में ‘हाई-रिस्क, हाई-रिटर्न’ की संभावना अधिक होती है। यदि औद्योगिक मांग इसी तरह बनी रही, तो चांदी जल्द ही ₹4 लाख प्रति किलो का स्तर पार कर सकती है, जो इसे शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है।
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