15,000 करोड़ के बायबैक का बड़ा ऐलान
मुंबई: वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में विप्रो(Wipro) का मुनाफा सालाना आधार पर 1.89% घटकर ₹3,502 करोड़ रहा है। हालांकि, तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर देखें तो मुनाफे में 12% का सुधार हुआ है, जो कंपनी की रिकवरी को दर्शाता है। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 8% बढ़कर ₹24,236 करोड़ पर पहुँच गया है, जो व्यवसाय(Business) के विस्तार का संकेत है।
शेयरधारकों के लिए प्रीमियम बायबैक
विप्रो ने अपने निवेशकों को खुश करने के लिए ₹15,000 करोड़ के शेयर बायबैक की योजना बनाई है। कंपनी ने इसके लिए ₹250 प्रति शेयर की कीमत तय की है, जो मौजूदा बाजार भाव (लगभग ₹210) से करीब 19% ज्यादा है। इस प्रक्रिया के जरिए कंपनी कुल 60 करोड़ शेयर वापस खरीदेगी, जो इसकी कुल शेयर कैपिटल का 5.7% हिस्सा है।
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बायबैक और विप्रो का इतिहास
बायबैक का यह कदम दर्शाता है कि कंपनी के पास पर्याप्त नकद (Cash) उपलब्ध है और वह अपने प्रमोटर्स की होल्डिंग को मजबूत करना चाहती है। विप्रो, जो कभी साबुन और तेल का व्यापार करती थी, आज अजीम प्रेमजी के नेतृत्व में 65 देशों में फैली एक दिग्गज आईटी और कंसल्टिंग कंपनी बन चुकी है। इस बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट की घोषणा शेयरधारकों की मंजूरी के बाद की जाएगी।
विप्रो के बायबैक में ‘प्रीमियम’ का क्या मतलब है और इससे निवेशकों को क्या फायदा होगा?
प्रीमियम का मतलब है कि कंपनी बाजार में चल रही मौजूदा कीमत से अधिक दाम पर शेयर वापस खरीद रही है। विप्रो के मामले में, शेयर ₹210 के आसपास है जबकि कंपनी इसे ₹250 में खरीद रही है, जिससे निवेशकों को प्रति शेयर लगभग ₹40 का सीधा मुनाफा हो सकता है।
विप्रो के मुनाफे में सालाना आधार पर गिरावट का मुख्य कारण क्या हो सकता है?
हालांकि रिपोर्ट में स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है, लेकिन आमतौर पर आईटी सेक्टर में परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी या वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी खर्च में कमी जैसे कारक मुनाफे पर दबाव डालते हैं। हालांकि, तिमाही आधार पर 12% की वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है।
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