प्रमित झावेरी ने छोड़ी ट्रस्टी की कुर्सी, नोएल टाटा को लिखी चिट्ठी
नई दिल्ली: टाटा ट्रस्ट्स(Tata Trusts) के प्रभावशाली ट्रस्टियों में से एक प्रमित झावेरी ने अपना पद छोड़ने का औपचारिक फैसला कर लिया है। उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को पत्र लिखकर सूचित किया है कि वे 11 फरवरी, 2026 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा नियुक्त नहीं होना चाहते। झावेरी, जो सिटी बैंक (CitiBank) के पूर्व सीईओ भी रह चुके हैं, फरवरी 2020 में इस प्रतिष्ठित बोर्ड का हिस्सा बने थे। उन्होंने अपने इस कार्यकाल को एक बड़ा सम्मान बताया है।
रतन टाटा के भरोसेमंद सिपहसालार की विदाई
प्रमित झावेरी उन चुनिंदा लोगों में से थे जिन्हें खुद दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा(Tata Trusts) ने व्यक्तिगत रूप से चुना और जिम्मेदारी(Responsibility) सौंपी थी। रतन टाटा के विजन को आगे बढ़ाने में झावेरी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। चिट्ठी में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले के बारे में उनकी नोएल टाटा से पहले ही चर्चा हो चुकी थी। रतन टाटा के करीबियों का धीरे-धीरे बोर्ड से हटना इस बात का संकेत है कि अब नोएल टाटा के नेतृत्व में ट्रस्ट की नई टीम और रणनीति तैयार हो रही है।
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सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की अहमियत
जिस सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट(Tata Trusts) से प्रमित झावेरी हट रहे हैं, वह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले प्रमुख परोपकारी ट्रस्टों में से एक है। सर रतन टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर यह संस्था टाटा संस के 51% से अधिक शेयरों की मालिक है। इस ट्रस्ट का निर्णय न केवल चैरिटी के कामों को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे टाटा ग्रुप के कॉर्पोरेट फैसलों में भी बड़ी भूमिका निभाता है। झावेरी का जाना ट्रस्ट के भविष्य के पुनर्गठन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रमित झावेरी का टाटा ट्रस्ट्स से हटना टाटा समूह के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रमित झावेरी को रतन टाटा(Tata Trusts) का करीबी और वित्तीय मामलों का विशेषज्ञ माना जाता था। टाटा संस पर नियंत्रण रखने वाले ट्रस्ट में उनकी भूमिका अहम थी। उनके हटने से नोएल टाटा के पास अब बोर्ड को नए सिरे से गठित करने और अपने भरोसेमंद सहयोगियों को लाने का अवसर होगा, जो टाटा ग्रुप के भविष्य के प्रबंधन के लिए निर्णायक हो सकता है।
क्या प्रमित झावेरी ने पद छोड़ने का कोई विशेष कारण बताया है?
झावेरी ने पत्र में किसी विवाद या मतभेद का जिक्र नहीं किया है। उन्होंने केवल अपना कार्यकाल खत्म होने और उसे आगे न बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की है। उनके शब्दों में, यह एक औपचारिक निर्णय है जिसकी जानकारी उन्होंने प्रबंधन को समय रहते दे दी है।
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