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Tata Trusts: टाटा ट्रस्ट्स की अहम बैठक अब 16 मई को

Author Icon By Dhanarekha
Updated: May 8, 2026 • 2:15 PM
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टाटा संस की लिस्टिंग और नेतृत्व पर फंसा पेंच

नई दिल्ली: टाटा ट्रस्ट्स(Tata Trusts) की 8 मई को होने वाली महत्वपूर्ण बोर्ड मीटिंग अब दूसरी बार टलकर 16 मई को तय की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के भीतर गवर्नेंस और टाटा संस के बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर कुछ वैचारिक मतभेद उभरे हैं। इस बैठक में वेणु श्रीनिवासन(Venu Srinivasan) की जगह भास्कर भट को नॉमिनी डायरेक्टर बनाने पर चर्चा होनी थी, लेकिन ट्रस्टियों के बीच आपसी असहमति के कारण फिलहाल इसे आगे बढ़ा दिया गया है। बार-बार तारीख बदलने से ग्रुप के भविष्य की रणनीतियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है

टाटा संस की लिस्टिंग और RBI का दबाव

विवाद का सबसे बड़ा केंद्र टाटा संस का शेयर बाजार में लिस्ट होना (IPO) है। RBI के नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 तक टाटा संस जैसी बड़ी होल्डिंग कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा ट्रस्ट्स के कुछ सदस्य पारदर्शिता के लिए लिस्टिंग के पक्ष में हैं, जबकि चेयरमैन नोएल टाटा इसे एक निजी कंपनी (Private) ही बनाए रखना चाहते हैं। उन्हें डर है कि पब्लिक कंपनी बनने से टाटा संस पर ट्रस्ट का नियंत्रण कम हो सकता है।

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चेयरमैन और ट्रस्ट के बीच वैचारिक टकराव

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख नोएल टाटा के बीच कामकाज के तरीकों को लेकर भी खींचतान की खबरें हैं। जब नोएल टाटा ने लिस्टिंग न करने की गारंटी मांगी, तो चंद्रशेखरन ने इसे रेगुलेटरी मामला बताते हुए इनकार कर दिया। इसी कारण चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल की नियुक्ति पर भी अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। 16 मई की बैठक में इन मुद्दों को सुलझाना ग्रुप की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करना क्यों जरूरी हो गया है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नियम है कि अगर किसी बड़ी वित्तीय कंपनी (NBFC) की संपत्ति 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे 2026 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना होगा। टाटा संस इसी दायरे में आती है, इसलिए उस पर IPO लाने का कानूनी दबाव है।

‘नॉमिनी डायरेक्टर’ कौन होता है और टाटा ग्रुप में इसे लेकर चर्चा क्यों हो रही है?

जब कोई बड़ी संस्था (जैसे टाटा ट्रस्ट्स) किसी दूसरी कंपनी (जैसे टाटा संस) की मालिक होती है, तो वह अपने हितों की देखरेख के लिए वहां अपना एक प्रतिनिधि भेजती है, जिसे ‘नॉमिनी डायरेक्टर’ कहते हैं। बैठक में इसी पद पर नए व्यक्ति की नियुक्ति को लेकर फैसला होना है।

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