राष्ट्रपति की शक्तियों को बताया अवैध
वाशिंगटन: अमेरिका के एक फेडरल ट्रेड कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प(Trump) द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क (टैरिफ) को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया है। अदालत ने 2-1 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की सीमाओं को पार किया है। कोर्ट(Court) के अनुसार, बिना अमेरिकी कांग्रेस की अनुमति के इतने बड़े पैमाने पर जनता और व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डालना कानूनन गलत है। जजों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ असीमित नहीं हैं।
व्यापार घाटे की दलील को कोर्ट ने किया खारिज
ट्रम्प प्रशासन ने तर्क दिया था कि अमेरिका का 1.2 ट्रिलियन डॉलर का विशाल व्यापार घाटा देश की अर्थव्यवस्था(Economy) के लिए खतरा है, इसलिए धारा 122 के तहत यह टैरिफ लगाना जरूरी था। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से नकार दिया। अदालत ने कहा कि जिस ‘व्यापार घाटे’ की बात प्रशासन कर रहा है, वह कानून की उन अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करता जो राष्ट्रपति को अकेले फैसला लेने का अधिकार देती हैं। इस फैसले से उन छोटे व्यापारियों को राहत मिली है जो विदेशी सामानों पर निर्भर हैं।
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भारत और वैश्विक सप्लाई चेन पर सकारात्मक असर
इस फैसले का भारत जैसे देशों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। ट्रम्प की टैरिफ नीति से भारतीय निर्यातकों में डर था कि उनके उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। अब कोर्ट के इस आदेश के बाद भारतीय सामानों की अमेरिका में पहुंच आसान बनी रहेगी और लागत में अचानक बढ़ोतरी का खतरा कम हो गया है। खिलौना और अन्य सामान बनाने वाली कंपनियों ने इसे एक बड़ी जीत बताया है, क्योंकि इससे सप्लाई चेन में स्थिरता आएगी और कीमतें नियंत्रण में रहेंगी।
कोर्ट ने ट्रम्प के 10% टैरिफ वाले फैसले को अवैध क्यों माना?
कोर्ट का मानना है कि राष्ट्रपति के पास संसद (कांग्रेस) की मंजूरी के बिना इतने बड़े स्तर पर टैक्स या टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है। राष्ट्रपति ने जिस ‘ट्रेड एक्ट 1974’ का हवाला दिया था, उसकी शर्तें इस मामले में लागू नहीं होती थीं।
इस फैसले से आम व्यापारियों और कंपनियों को क्या फायदा होगा?
इस फैसले से उन कंपनियों को फायदा होगा जो दूसरे देशों से कच्चा माल या सामान मंगाती हैं। अब उन्हें 10% अतिरिक्त टैक्स नहीं देना पड़ेगा, जिससे सामान सस्ता रहेगा और उनकी व्यापारिक लागत में कमी आएगी।
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