KPIT: KPIT के को-फाउंडर रवि पंडित का निधन

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भारतीय ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर जगत के एक युग का अंत

पुणे: केपीआईटी (KPIT) ग्रुप के चेयरमैन और को-फाउंडर रवि पंडित का 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्हें भारतीय ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का ‘आर्किटेक्ट’ माना जाता है। तीन दशकों से अधिक के अपने नेतृत्व में, उन्होंने पुणे की एक छोटी सी आईटी कंपनी को विश्व स्तर की ‘मोबिलिटी इंजीनियरिंग’ फर्म में बदल दिया। आज उनकी कंपनी अमेरिका, यूरोप और एशिया के दिग्गज वाहन निर्माताओं को सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी और ऑटोनॉमस ड्राइविंग जैसी उन्नत तकनीकें प्रदान कर रही है

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और सस्टेनेबिलिटी में योगदान

रवि पंडित(Ravi Pandit) का योगदान केवल व्यापार तक सीमित नहीं था, उन्होंने भारत के ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ में निजी क्षेत्र के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका(Important Role) निभाई। वे स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के प्रति बेहद सजग थे। उन्होंने ‘हृदय’ जैसी पहलों के माध्यम से ग्रामीण और कृषि विकास में हाइड्रोजन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया। वे न केवल एक सफल उद्यमी थे, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को समझने वाले एक दूरदर्शी नीति निर्धारक भी थे।

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बहुमुखी प्रतिभा: गोल्ड मेडलिस्ट CA से लेकर लेखक तक

पेशावर जीवन में रवि पंडित एक गोल्ड मेडलिस्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और उन्होंने मशहूर MIT स्लोअन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से शिक्षा प्राप्त की थी। वे ‘कीर्तने एंड पंडित’ सीए फर्म के भी चेयरमैन थे, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इसके अलावा, उन्होंने ‘लीपफ्रॉगिंग टू पोल-वॉल्टिंग’ जैसी पुरस्कार विजेता पुस्तक लिखी, जो नवाचार (Innovation) पर आधारित है। उन्हें उनके कार्यों के लिए कई विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डॉक्टरेट से भी सम्मानित किया गया था।

रवि पंडित को ‘ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर का आर्किटेक्ट’ क्यों कहा जाता है?

उन्होंने उस समय ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर पर काम करना शुरू किया था जब गाड़ियां मुख्य रूप से मैकेनिकल होती थीं। उन्होंने ‘सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी’ को बढ़ावा दिया, जहाँ कार के फीचर्स सॉफ्टवेयर से चलते हैं। उनके नेतृत्व में KPIT ने दुनिया के 15 देशों में अपनी तकनीक का विस्तार किया।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में उनकी क्या भूमिका थी?

वे भारत सरकार के ‘एम्पायर्ड ग्रुप फॉर नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ में शामिल होने वाले निजी क्षेत्र के इकलौते सदस्य थे। उन्होंने भारत को स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) का ग्लोबल हब बनाने के लिए रणनीतिक सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन दिया।

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