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Breaking News: Tax: मध्यम वर्ग को बड़ी राहत की मांग, घटे टैक्स दरें

Author Icon By Dhanarekha
Updated: October 30, 2025 • 10:46 AM
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50 लाख तक की आय पर कम टैक्स दर का सुझाव

नई दिल्ली: उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई(PHDCCI) ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि 50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले लोगों पर कर(Tax) का बोझ घटाया जाए। संगठन का कहना है कि 30 प्रतिशत की उच्चतम टैक्स(Tax) दर केवल उन्हीं करदाताओं पर लागू होनी चाहिए जिनकी आय 50 लाख रुपये से अधिक है। वर्तमान नई कर व्यवस्था में 24 लाख रुपये से अधिक कमाने वालों पर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिससे मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त दबाव बनता है

आयकर दरों में कटौती से बढ़ेगा कर अनुपालन

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आगामी केंद्रीय बजट(Central Budget) के लिए दिए अपने सुझावों में कहा कि आयकर दरों में कमी से करदाताओं की संख्या और अनुपालन दोनों में वृद्धि होगी। संगठन ने प्रस्ताव दिया है कि 30 लाख रुपये तक की आय पर अधिकतम 20 प्रतिशत, 30 से 50 लाख रुपये की आय पर 25 प्रतिशत और 50 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाए। इस कदम से मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी और सरकार के राजस्व प्रवाह में स्थिरता आएगी।

कॉरपोरेट टैक्स में भी सुधार का प्रस्ताव

उद्योग मंडल ने बताया कि कॉरपोरेट टैक्स(Tax) दर को 35 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने के बाद भी कर संग्रह बढ़ा है। वित्त वर्ष 2018-19 में यह 6.63 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 8.87 लाख करोड़ रुपये हो गया। इससे यह साबित होता है कि टैक्स दरों में लचीलापन देने से राजस्व में सुधार होता है और करदाताओं का भरोसा बढ़ता है।

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निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा

पीएचडीसीसीआई ने यह भी सिफारिश की है कि नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को प्रोत्साहन देने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 115बीएबी के तहत 15 प्रतिशत की रियायती कॉरपोरेट कर दर फिर से लागू की जाए। इससे न केवल विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निर्माण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

टैक्स दर घटाने से सरकार को क्या लाभ होगा

कर दरों में कमी से लोगों का अनुपालन बढ़ेगा, जिससे सरकार के राजस्व में दीर्घकालिक स्थिरता आएगी। इससे अधिक लोग टैक्स प्रणाली में शामिल होंगे और आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

क्या कॉरपोरेट टैक्स में बदलाव से निवेश बढ़ेगा

हाँ, कॉरपोरेट टैक्स कम करने से विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स भारत में स्थापित होंगी। इससे उद्योग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और रोजगार के अवसर दोनों बढ़ेंगे।

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