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Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील

Dhanarekha
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Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील

निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार का रास्ता साफ

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत अब अपने अंतिम चरण में है। 23 फरवरी से अमेरिका में शुरू होने वाली तीन दिवसीय बैठक में इस समझौते का कानूनी ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। इस डील के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैक्स(American Tax) को 25% से घटाकर 18% करने का आदेश जल्द ही आने की उम्मीद है। यह समझौता मुख्य रूप से कपड़ा, चमड़ा और जेम्स-ज्वैलरी जैसे क्षेत्रों को मजबूती प्रदान करेगा

शून्य टैरिफ और कृषि निर्यात को बढ़ावा

इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में जीरो टैरिफ (शून्य शुल्क) पर निर्यात किया जा सकेगा। इसके विपरीत, भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों को ऐसी कोई टैरिफ छूट नहीं दी है और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फूड के प्रवेश पर भी पाबंदी बरकरार रखी है। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है, जो भारत की कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।

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नॉन-टैरिफ बाधाओं का समाधान और वैश्विक विस्तार

टैरिफ के अलावा, दोनों देश व्यापार में आने वाली प्रशासनिक और तकनीकी रुकावटों (नॉन-टैरिफ बैरियर्स) को दूर करने पर भी सहमत हुए हैं। भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से $500 बिलियन के उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि अप्रैल 2026 से ब्रिटेन और ओमान के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भी लागू होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय सामानों की पहुँच यूरोप और खाड़ी देशों तक आसान हो जाएगी।

‘अंतरिम व्यापार समझौता’ (ITA) भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपए ($30 ट्रिलियन) के विशाल अमेरिकी बाजार को खोलता है। टैक्स में कटौती और टैरिफ छूट मिलने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अन्य देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे।

क्या इस डील से भारत में अमेरिकी सामान भी सस्ता होगा?

इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से अगले 5 साल में 50 हजार करोड़ डॉलर के उत्पाद खरीदने की सहमति दी है। हालांकि, भारत ने अपनी संवेदनशील श्रेणियों (जैसे कृषि और GM फूड) को सुरक्षित रखा है, लेकिन मेडिकल डिवाइसेस और कुछ अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में नॉन-टैरिफ बाधाएं हटने से व्यापार सुगम होगा।

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