रांची के वेंकटेश्वर मंदिर में तिरुपति बालाजी की तर्ज पर बनी 10 किलो चांदी की प्रतिमा है. कहते हैं दूर से दर्शन मात्र से पाप कटते हैं. जानिए मंदिर की अद्भुत महिमा।
झारखंड की राजधानी रांची में एक ऐसा दिव्य स्थान है, जहां जाने से न केवल श्रद्धा मिलती है, बल्कि आत्मा तक को शांति का अनुभव होता है. श्री वेंकटेश्वर मंदिर, जो तिरुपति बालाजी के प्रतिरूप में रांची के पहाड़ी मंदिर के समीप स्थित है, अब भक्ति और दर्शन का प्रमुख केंद्र बन गया है।
इस मंदिर की खास बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति धोखे से भी इस मंदिर के दर्शन कर लेता है, तो उसके सारे पाप कट जाते हैं. यह बात मंदिर के मुख्य पुजारी सतनारायण जी ने साझा की, और उन्होंने बताया कि यहां कई भक्त वर्षों से दर्शन के लिए आ रहे हैं और अपने जीवन में सुख-शांति और अद्भुत बदलाव महसूस कर रहे हैं।
भगवान विष्णु के सभी अवतार और 10 किलो चांदी की दिव्य प्रतिमा
इस मंदिर की एक और अनोखी विशेषता यह है कि यहां भगवान विष्णु के सभी 10 अवतार जैसे मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन आदि को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
भगवान वेंकटेश्वर की मुख्य प्रतिमा 10 किलोग्राम शुद्ध चांदी से बनी है, जो दिव्यता और भव्यता की प्रतीक है।
खीर रूपी ‘प्रसादम’ और साउथ इंडियन आस्था का संगम
- यह मंदिर खासतौर पर रांची में रहने वाले साउथ इंडियन समुदाय के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है.
प्रसाद के रूप में दी जाने वाली ‘खीर’ यहां की प्रसिद्धि को और भी बढ़ा देती है। - आंध्र प्रदेश से आए अभिनव, जो अब रांची में रहते हैं, कहते हैं कि यह मंदिर मुझे अपने घर जैसा लगता है. यहां आकर तिरुपति जाने जैसी अनुभूति होती है।”
शांति और आत्मिक सुकून का स्थान
यहां दर्शन करने आईं सुकन्या कहती हैं कि यहां बैठकर तीन घंटे का समय कैसे बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। दिल करता है यहीं बैठी रहूं. तिरुपति और यहां के अनुभव में कोई फर्क नहीं है।