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Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर सुहागिनों के लिए खास

Surekha Bhosle
Surekha Bhosle
Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर सुहागिनों के लिए खास

वैवाहिक जीवन में बढ़ाएं मिठास, करें ये काम

खुशियों और नई शुरुआत का पर्व- मकर संक्रांति हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है। इस दिन की शुभता को ध्यान में रखते हुए सुहागिनें अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली और मिठास बढ़ाने के लिए विशेष उपाय करती हैं।

 (Makar Sankranti Rituals) मकर संक्रांति का (Makar Sankranti) पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और पुारिवारिक खुशहाली का वरदान लेकर आता है। इस दिन किए गए कुछ विशेष कार्य वैवाहिक जीवन में मधुरता लाते हैं। साथ ही, घर की सुख-समृद्धि के द्वार भी खोलते हैं। आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर शादीशुदा महिलाओं के लिए कुछ विशेष नियम और परंपराओं के बारे में

मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के दिन सूर्य देव (Sun god) का उत्तरायण होना ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं के लिए यह दिन अपनी परंपराओं के जरिए परिवार की भलाई की प्रार्थना करने का होता है। इस दिन किए जाने वाले अनुष्ठानों का फल सीधा पति की लंबी आयु और बच्चों की उन्नति से जुड़ा माना जाता है।

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सुहागिन महिलाएं इस दिन क्या करें?

उबटन और स्नान: इस दिन तिल के उबटन का प्रयोग करना चाहिए। नहाने के पानी में काले तिल और गंगाजल मिलाकर स्नान करना बेहद शुभ होता है।

हल्दी-कुमकुम का विधान: कई क्षेत्रों में इस दिन हल्दी-कुमकुम का उत्सव मनाया जाता है। सुहागिनें एक-दूसरे को हल्दी और सिंदूर लगाकर सौभाग्य की कामना करती हैं।

विशेष श्रृंगार: संक्रांति पर महिलाओं को पूर्ण श्रृंगार करना चाहिए। संभव हो तो नए वस्त्र या पीले/लाल रंग के कपड़े पहनें, जो शुभता का प्रतीक हैं।

दान की परंपरा: सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री (जैसे चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी) किसी अन्य सुहागिन स्त्री या ब्राह्मण को दान करनी चाहिए।

परिवार की खुशहाली के लिए विशेष उपाय

14 वस्तुओं का दान: मकर संक्रांति पर ’14’ अंक का विशेष महत्व है। महिलाएं सुहाग की 14 चीजें दान करके अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं।

मकर संक्रांति के पीछे क्या कहानी है?मकर संक्रांति के पीछे की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र मकर राशि के स्वामी शनिदेव (से मिलने जाते हैं। सूर्य और शनि पिता-पुत्र होने के बाद भी आपस में शत्रुता रखते हैं, लेकिन इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि को माफ करते हैं और उनके घर पहुंचते हैं और पिता-पुत्र का मिलन होता है।

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