मकर संक्रांति और एकादशी का ये विशेष संयोग 23 सालों के बाद बन रहा है. एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-उपासना से विशेष फल मिलता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति पर सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा किस विधि से की जाएगी?
Makar Sankranti And Ekadashi 2026 Puja Vidhi: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक बड़ा ही पावन त्योहार है. ये त्योहार हर साल माघ मास में तब मनाया जाता है जब भगवान सूर्य शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं. मकर संक्रांति देश भर में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है. इस पवित्र नदियों में स्नान-दान और भगवान सूर्य की विशेष पूजा-उपासना की जाती है. इस साल मकर संक्रांति के दिन एकादशी का व्रत भी रहेगा।
मकर संक्रांति (Makar Sankranti) और एकादशी का ये विशेष संयोग 23 सालों के बाद बन रहा है. एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा-उपासना से विशेष फल मिलता है. मकर संक्रांति के दिन एकादशी के अलावा भी विशेष संयोग बन रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति पर सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा किस विधि से की जाएगी?
संक्रांति के दिन ही है एकादशी व्रत
इस साल 14 जनवरी को सूर्य देव का मकर राशि मेंं प्रवेश होगा. इसी दिन मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा. इस दिन पुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक यानी 2 घंटे 32 मिनट रहेगा. महा पुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक 1 घंटे 45 मिनट रहेगा।
वहीं पंचांग के मुताबिक, माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से होगी और 14 जनवरी शाम 05 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर ही षटतिला एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा।
मकर संक्रांति पर ऐसे करें सूर्य देव की पूजा
ब्रह्म मुहूर्त में उठें और भगवान विष्णु और सूर्य देव के ध्यान से करें. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करें. नहाने के बाद तांबे के लोटे में अक्षत और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें. इस दौरान ऊँ सूर्याय नम: ऊँ खगाय नम:, ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ रवये नम:, ऊँ भानवे नम:, ऊँ आदित्याय नम: मंत्र का जाप करें. इसके बाद सूर्य स्तुति का पाठ करें.
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षटतिला एकादशी पूजा विधि
षटतिला एकादशी पर स्नान आदि करके वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें. इसके बाद बाद गंगाजल का छिड़काव करें. फिर एक चौकी पर लाल रंग का आसन बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें. विष्णु जी की पूजा के दौरान उन्हें गोपी चंदन, फल-फूल और तुलसी दल चढ़ाएं.देसी घी का दीपक और कपूर जलाएं. विष्णु जी को पंचामृत, मिठाई, तिलकुट आदि का भोग लगाएं. भोग में तुलसी दल डालें. विष्णु जी के मंत्रों का जप और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. अंत में भगवान की आरती करें।
मकर संक्रांति का इतिहास क्या है?
ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। । मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।
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