Somnath Temple : सोमनाथ मंदिर में 2026 का भव्य ‘कुंभाभिषेक’

Author Icon By Surekha Bhosle
Updated: May 11, 2026 • 11:59 AM
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जानिए क्या होता है यह महा-अनुष्ठान और क्यों है इसका विशेष धार्मिक महत्व

नई दिल्ली: सोमनाथ मंदिर में आयोजित होने जा रहा ‘कुंभाभिषेक’ समारोह श्रद्धा, परंपरा और वैदिक संस्कृति का एक भव्य संगम माना जा रहा है। यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा, पवित्रता और दिव्यता को पुनः जागृत करने के लिए किया जाता है।

Somnath Amrit Mahotsav 2026: कुंभाभिषेक एक अत्यंत विशेष धार्मिक अनुष्ठान है, जो किसी मंदिर या तीर्थस्थल की पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने के लिए किया जाता है। सोमनाथ मंदिर में आज यानी 11 मई 2026 को 11 पवित्र तीर्थस्थलों के जल से विशेष कुंभाभिषेक किया जाएगा।

Kumbhabhishek Kya Hota Hai: 11 मई ये वही ऐतिहासिक तारीख है जिस दिन भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) का पुनर्निर्माण हुआ था और आज इसके 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसलिए इस खास अवसर पर ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे हैं। पीएम मोदी मंदिर की विशेष महापूजा, ध्वजारोहण (Flag Hoisting) और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे। खास बात ये है कि पहली बार मंदिर में 11 पवित्र तीर्थस्थलों के जल से विशेष कुंभाभिषेक भी किया जाएगा। लेकिन ये कुंभाभिषेक होता क्या है? इसका क्या महत्व है और ये क्यों जरूरी है? चलिए इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

कुंभाभिषेक क्या है?

कुंभाभिषेक दो शब्दों से मिलकर बना है – कुंभ यानी कलश या पवित्र पात्र और अभिषेक यानी पवित्र स्नान। जब विशेष वैदिक मंत्रों और विधियों से अभिमंत्रित जल को मंदिर के शिखर, कलश और देवी-देवताओं की मूर्तियों पर चढ़ाया जाता है तो उसे कुंभाभिषेक कहते हैं। यह एक तरह का विशेष अनुष्ठान होता है जो दक्षिण भारत के मंदिरों में 10 से 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित किया जाता है। लेकिन सोमनाथ मंदिर में ये अनुष्ठान पहली बार होने जा रहा है।

मंदिर की ऊर्जा को करता है जागृत

कुंभाभिषेक एक खास धार्मिक अनुष्ठान है, जो किसी भी तीर्थस्थल या मंदिर की पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा को फिर से जागृत करने के लिए किया जाता है। जब कोई मंदिर नया बनता है, तब सबसे पहले नूतन कुंभाभिषेकम नाम का विशेष अभिषेक किया जाता है। इस अनुष्ठान का उद्देश्य मूर्तियों में देवताओं की ऊर्जा को स्थापित करना होता है। इसके बाद 10 से 12 सालों के अंतराल पर इस ऊर्जा को फिर से जागृत करने के लिए कुंभाभिषेक किया जाता है। 

सोमनाथ मंदिर में पहली बार होगा ये अनुष्ठान

सोमनाथ मंदिर को फिर से बने 75 साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में पहली बार यहां कुंभाभिषेक किया जाएगा। जिसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर के ऊंचे शिखर पर देश भर के 11 प्रमुख तीर्थ स्थलों से एकत्रित जल का उपयोग करके कुंभाभिषेक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ, पुजारी मंदिर के शिखर को स्नान कराएंगे। यह माना जाता है कि मंदिर के शिखर पर जल अर्पण करने से ब्रह्मांडीय ऊर्जा मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग में समाहित हो जाती है। 

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कुंभाभिषेक कैसे किया जाता है?

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