తెలుగు | Epaper

Makar Sankranti : तिल की उत्पत्ति और मकर संक्रांति पर इसकी अहमियत

Surekha Bhosle
Surekha Bhosle
Makar Sankranti : तिल की उत्पत्ति और मकर संक्रांति पर इसकी अहमियत

मकर संक्रांति का महत्व- सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का पर्व- मकर संक्रांति हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश को दर्शाता है और इसे नई शुरुआत, स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के (Makar Sankranti) दिन पवित्र नदियों पर स्नान न कर पाने वालों को तिल मिले जल से स्नान करने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इससे भी तीर्थ स्नान का फल प्राप्त हो जाता है. तिल का आयुर्वेद में भी बड़ा ही महत्व माना गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि तिल की उत्पत्ति कैसे हुई और क्यों ये मकर संक्रांति पर बहुत जरूरी माना गया है?

मकर संक्रांति पर सूर्य देव की विशेष पूजा

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का त्योहार देश भर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. ये हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है. ये पर्व सूर्य देव के मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करने पर मनाया जाता है. मकर संक्रांति पर सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है. पवित्र नदियों में स्नान-दान किया जाता है. इस दिन इन सब कामों को करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. इस साल उदया तिथि के अनुसार, ये पावन पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा. इस दिन स्नान-दान और पूजा-पाठ के साथ-साथ तिल का भी खास इस्तेमाल किया जाता है

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों पर स्नान न कर पाने वालों को तिल मिले जल से स्नान करने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इससे भी तीर्थ स्नान का फल प्राप्त हो जाता है. तिल का आयुर्वेद में भी बड़ा ही महत्व माना गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि तिल की उत्पत्ति कैसे हुई और क्यों ये मकर संक्रांति पर बहुत जरूरी माना गया है?

अन्य पढ़े: Deoghar News : नए साल पर देवघर में आस्था का महासंगम

तिल की उत्पत्ति की कहानी

बताया जाता है कि हिरण्यकशिपु द्वारा पुत्र प्रहलाद पर लगातार अत्याचार होते देख जगपालक भगवान श्री हरि विष्णु क्रोध से भर उठे. क्रोध में उनका शरीर पसीने से भर गया. कहा जाता है कि इसी पसीने के जमीन पर गिरने से तिल उत्पन्न हुआ. तिल गंगाजल के समान ही पावन माना जाता है. मान्यता है कि जैसे गंगाजल का स्पर्श मृत आत्माओं को वैकुंठ पहुंचा देता है. उसी तरह तिल भी पूर्वजों, भटकती आत्माओं और अतृप्त जीवों को मोक्ष का मार्ग दिखाता है।

मकर संक्रांति पर क्यों है जरूरी?

धर्म और ज्योतिष शास्त्र में तिल को सूर्य देव के पुत्र शनि देव का भी प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन इसकी उपयोगिता और भी अधिक बढ़ जाती है. इस दिन गुड़ और तिल साथ मिलाकर खाने, उनका दान करने से शनि और सूर्य दोनों का जीवन पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. मकर संक्रांति के दिन तिलकुट भरने की भी परंपरा चली आ रही है. उत्तर भारत में कुल देवता पर गुड़, चावल और तिल का प्रसाद चढ़ाया जाता है. ये प्रसाद परिवार में सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है।

तिल कैसे पैदा होते हैं?

तिल तब बनते हैं जब आपकी त्वचा की कोशिकाएँ पूरी त्वचा में फैलने के बजाय एक समूह में बढ़ती हैं। ज़्यादातर तिल मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं से बने होते हैं, जो आपकी त्वचा को उसका प्राकृतिक रंग देने वाला रंगद्रव्य बनाते हैं।

अन्य पढ़े:

📢 For Advertisement Booking: 98481 12870