Uttarakhand : कैंची धाम में ट्रैफिक जाम से राहत!

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कैंची धाम
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उत्तराखंड (Uttarakhand) का कैंची धाम (Kainchi Dham) मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है. कैंची धाम मंदिर बाबा नीम करोली से जुड़ा हुआ है. इस मंदिर में रोजना भारी संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. इससे इलाके में ट्रैफिक जाम की समस्या हो जाती है. अब लोगों को यहां आने पर ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े, इसके लिए कैंची धाम आने वाले भक्तों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी जाएगी

इसके लिए नैनीताल की डीएम की ओर से राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है. अब पर्यटन विभाग ने ये जानने के लिए सर्वे कराएगा कि इलाके की धारण क्षमता कितनी है. इसमें वाहनों के नंबर प्लेट पहचान के लिए एएनपीआर कैमरों के साथ-साथ भक्तों की हेड काऊंटिंग के लिए मंदिर के दरवाजे पर कैमरे लगाने का काम किया जा रहा है।

नैनीताल डीएम वंदना सिंह ने क्या बताया?

डीएम वंदना सिंह ने बताया है कि सरकर को भेजे गए प्रस्ताव के बाद अब पर्यटन विभाग ने कैंची धाम और उसके आसपास के इलाकों की धारण क्षमता जानने के लिए सर्वे कराने और अलग-अलग जगहों पर कैमरे लगाने के लिए टीम का गठन कर काम शुरू कर दिया है. इसके लिए कैंची धाम एसडीएम को टीम को गाइड करने और सहयोग करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

20 दिनों में कैंचीधाम में 3 लाख 72 हजार भक्त पहुंचे

बता दें कि जिला प्रशाशन की ओर से ये पता लगाने के लिए सर्वे कराया गया था कि कैंची धाम पहुंचने वाले अत्याधिक भक्तों के कारण इलाके में जाम लगने के साथ-साथ और कौनसी समस्याएं आ रही हैं. रिपोर्ट में पता चला था कि सर्वे के 20 दिनों में 3 लाख 72 हजार भक्त पहुंचे. वीकेंड में रोजाना 20 से 22 हजार भक्त कैंची धाम में पहुंचे।

इसके इतर प्रबंधन समीति का जो क्षमता आकलन है, उसके तहत एक दिन में सिर्फ सात हजारों भक्तों को ही कैंचीधाम में आसानी से दर्शन प्राप्त हो सकता है।

क्या चमत्कार हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कैंची धाम की मिट्टी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

क्यों कैंची धाम इतना प्रसिद्ध है?

कैंची धाम आश्रम उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जो श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। बाबा नीम करोली महाराज के दर्शन के लिए देश-विदेश से भक्त यहां पहुंचते हैं। उन्हें कलयुग में भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है।

बाबा नीम करोली की मृत्यु कैसे हुई थी?

नीम करोली बाबा का निधन 11 सितंबर 1973 को हुआ था। वे मधुमेह के कारण कोमा में चले गए थे और वृंदावन के एक अस्पताल में लगभग 1:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से लाखों श्रद्धालुओं को गहरा दुख पहुंचा।

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Surekha Bhosle

लेखक परिचय

Surekha Bhosle

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