Sports World: खेल जगत में कोहराम: दुनिया का पहला ‘डोपिंग फ्रेंडली’ टूर्नामेंट आयोजित

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ड्रग्स और स्टेरॉयड्स लेकर उतरे 42 टॉप एथलीट्स

न्यूयोर्क : जोखिम और मुनाफे के शहर लास वेगास में खेल इतिहास का सबसे विवादित अध्याय लिखा गया है। 48 वर्षीय अरबपति बायोहैकर क्रिश्चियन एंगरमेयर ने ‘एनहैंस्ड गेम्स’ (Enhanced Games) नाम से दुनिया का पहला ऐसा टूर्नामेंट आयोजित किया, जहाँ एथलीट्स पर ड्रग्स, स्टेरॉयड और हार्मोन्स लेने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि उन्हें खुलेआम डोपिंग के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस अनोखे आयोजन में दुनिया के 42 शीर्ष तैराकों, धावकों और वेटलिफ्टरों ने हिस्सा लिया। इस दौरान ग्रीक ओलिंपिक तैराक क्रिस्टियन गोलोमेव ने भारी ड्रग्स के प्रभाव में 50 मीटर फ्रीस्टाइल में आधिकारिक वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ दिया, जिसके लिए उन्हें ₹9.55 करोड़ का भारी-भरकम बोनस मिला

Sports World: खेल नहीं व्यापार: 650 लाख करोड़ की वेलनेस इंडस्ट्री पर नजर

इस विवादित टूर्नामेंट के पीछे का असली मकसद खेल भावना नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा बिजनेस एम्पायर खड़ा करना है। लगभग ₹11,460 करोड़ की वैल्यूएशन वाली इस कंपनी (एनहैंस्ड गेम्स इंक) के पीछे सिलिकॉन वैली के दिग्गज अरबपति पीटर थिएल और ‘1789 कैपिटल’ जैसी बड़ी फर्मों का पैसा लगा है। दरअसल, यह टूर्नामेंट ₹650 लाख करोड़ की वैश्विक वेलनेस और एंटी-एजिंग इंडस्ट्री को भुनाने के लिए एक ‘लाइव विज्ञापन’ की तरह इस्तेमाल किया गया। कंपनी जल्द ही अपने टेलीहेल्थ प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों को टेस्टोस्टेरोन और उम्र रोकने वाले (एंटी-एजिंग) सप्लीमेंट्स बेचने की तैयारी में है।

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खेल जगत में भारी आक्रोश और जान का बड़ा खतरा

इस आयोजन के बाद पूरी दुनिया के खेल विशेषज्ञ और मेडिकल वैज्ञानिक गुस्से में हैं। अमेरिकी एंटी-डोपिंग एजेंसी के प्रमुख ट्रैविस टायगार्ट का मानना है कि इससे बच्चों और युवा खिलाड़ियों में बेहद गलत संदेश जाएगा कि खेल में जीतने के लिए ड्रग्स लेना जरूरी है। वहीं, वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) ने गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि डॉक्टरों की देखरेख में भी इन प्रतिबंधित दवाओं का कॉकटेल लेने से भविष्य में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लिवर फेल होना और अचानक मौत होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

‘एनहैंस्ड गेम्स’ टूर्नामेंट क्या है और इसमें शामिल होने वाले एथलीट्स किस तरह की दवाओं के प्रभाव में थे?

‘एनहैंस्ड गेम्स’ दुनिया का पहला ऐसा टूर्नामेंट है जिसमें एथलीट्स को खुलेआम ड्रग्स और स्टेरॉयड (डोपिंग) लेकर खेलने की इजाजत दी गई। इसमें शामिल होने वाले 42 शीर्ष एथलीट्स में से 91% खिलाड़ी टेस्टोस्टेरोन और 79% खिलाड़ी ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन (HGH) के भारी डोज पर थे।

वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) ने इस टूर्नामेंट को लेकर क्या गंभीर चेतावनी दी है?

वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी ने चेतावनी दी है कि भले ही ये खतरनाक दवाएं डॉक्टरों की देखरेख में दी जा रही हों, लेकिन इन दवाओं और हार्मोन्स के खतरनाक कॉकटेल के कारण एथलीट्स को भविष्य में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लिवर डैमेज और अचानक मौत का गंभीर सामना करना पड़ सकता है।

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