Sangareddy : बायोचार टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लिए होगा महत्वपूर्ण

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कृषि अपशिष्ट से बने कार्बन युक्त उत्पाद बायोचार के लाभों पर डाला प्रकाश

संगारेड्डी। अरण्य एग्रीकल्चर अल्टरनेटिव की सीईओ पद्मा कोप्पुला ने कृषि अपशिष्ट से बने कार्बन युक्त उत्पाद बायोचार के लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पाया कि बायोचार मिट्टी में पोषक तत्वों और पानी को बनाए रखने में मदद करेगा, सूक्ष्मजीवी गतिविधि को बढ़ावा देगा और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करेगा। झारासंगम मंडल के बिदकने गांव में रायथू वेदिका में शनिवार को आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए पद्मा ने कहा कि बायोचार सैकड़ों सालों तक मिट्टी में कार्बन को बनाए रखेगा, जिससे यह जलवायु के अनुकूल समाधान बन जाएगा।

टिकाऊ कृषि के लिए बायोचार से खाद बनाने की शुरुआत

उन्होंने किसानों से टिकाऊ कृषि के लिए बायोचार से खाद बनाने की शुरुआत करने का आग्रह किया। जिला कृषि अधिकारी (डीएओ) के शिव प्रसाद ने कपास के लिए उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (एचडीपीएस) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे कम अंतराल पर प्रति एकड़ अधिक कपास के बीज बोने से उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि एचडीपीएस कम कपास पैदावार की समस्या को हल करने और हमारे देश में कपास की बढ़ती मांग को पूरा करने का सही रास्ता है।

कृषि के लिए नि:शुल्क बायोचार

अधिकारियों ने कार्यक्रम का आयोजन करने वाली नुजिवीडू सीड्स की परोपकारी दृष्टिकोण के लिए प्रशंसा की तथा कहा कि कंपनी किसानों को निःशुल्क बायोचार उपलब्ध करा रही है। नुजिवीडू सीड्स के एक प्रतिनिधि ने कहा कि एचडीपीएस कपास किसानों के बीच लोकप्रियता हासिल कर रहा है, क्योंकि यह पारंपरिक खेती के तरीकों की तुलना में 3-5 क्विंटल अतिरिक्त कपास पैदा करता है।

एचडीपीएस कपास का पंजीकरण

अकेले इस सीजन में, देश के 59 जिलों में 35,000 एकड़ में एचडीपीएस कपास का पंजीकरण किया गया है, जो इस मॉडल में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ग्रामीण भारत में कृषि उपज और पर्यावरणीय स्वास्थ्य दोनों को लाभ होगा।

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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