हैदराबाद। यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) और ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन, तेलंगाना (डीसीए) के बीच दूसरा नियामक मंच वेंगल राव नगर स्थित डीसीए मुख्यालय में आयोजित किया गया। इस मंच में यूएसएफडीए के कंट्री डायरेक्टर ग्रेग स्मिथ, रेगुलेटरी स्पेशलिस्ट (फार्मास्यूटिकल्स) लिसा फ्लोरेस, रफीक हबीब तथा सीनियर टेक्निकल एडवाइजर ध्रुव शाह ने भाग लिया। यह नियामक मंच चिकित्सा उत्पादों के निरीक्षण से जुड़ी सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान और जनस्वास्थ्य (public health) को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण ज्ञान-साझाकरण मंच के रूप में आयोजित किया गया।
जीएमपी से संबंधित विभिन्न तकनीकी सत्र किए गए प्रस्तुत
इस दौरान यूएसएफडीए के विशेषज्ञों द्वारा एडवांस्ड गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) से संबंधित विभिन्न तकनीकी सत्र प्रस्तुत किए गए। डीसीए अधिकारियों ने भी अपनी हालिया पहलों, निरीक्षण पद्धतियों और निरीक्षण के रुझानों पर प्रस्तुति दी, विशेष रूप से संशोधित शेड्यूल-एम और स्टरल मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के निरीक्षण से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मंच के माध्यम से डीसीए निरीक्षकों को यूएसएफडीए के नियामक मानकों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं की बेहतर समझ प्राप्त हुई, जिससे नियामक कार्यप्रणाली और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूती मिली।
यूएस खाद्य एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन क्या है?
यह एक प्रमुख अमेरिकी सरकारी एजेंसी है, जिसे Food and Drug Administration कहा जाता है। इसका काम दवाओं, खाद्य पदार्थों, मेडिकल उपकरणों और सौंदर्य प्रसाधनों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करना होता है। यह एजेंसी यह भी देखती है कि बाजार में आने वाले उत्पाद सुरक्षित और प्रभावी हों।
यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन क्या है?
अमेरिका की यह संस्था Food and Drug Administration के नाम से जानी जाती है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए दवाओं, वैक्सीन, भोजन और चिकित्सा उपकरणों को मंजूरी देने और उनकी निगरानी करने का काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध कराना है।
ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन क्या है?
दवाओं के निर्माण, वितरण और उपयोग को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था को ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कहा जाता है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि दवाएं सुरक्षित, प्रभावी और मानकों के अनुसार हों। हर देश में इसके लिए अलग-अलग नियामक संस्थाएं होती हैं, जो दवा उद्योग पर निगरानी रखती हैं।
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