Good Work : अंतरराज्यीय गांजा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, एक आरोपी गिरफ्तार

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हैदराबाद। सिकंदराबाद रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ओडिशा के बालूगांव से सिकंदराबाद तक गांजा तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस दौरान बिहार निवासी एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सप्लायर फरार है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 14.322 किलोग्राम सूखा गांजा बरामद किया है, जिसकी कीमत लगभग 7,16,100 रुपये आंकी गई है। इस संबंध में एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धाराओं 8(सी) सहपठित 20(बी)(ii)(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के दौरान आरोपी को पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान जवाहर कुमार (32 वर्ष), निवासी खगड़िया जिला, बिहार के रूप में हुई है।

ओडिशा में मजदूरी कर रहा था जवाहर कुमार

वहीं, मुख्य आरोपी अखिलेश कुमार, निवासी बालूगांव (ओडिशा), फिलहाल फरार है। जांच में पता चला है कि जवाहर कुमार हाल ही में ओडिशा में मजदूरी कर रहा था, जहां उसकी मुलाकात अखिलेश कुमार से हुई। अखिलेश ने उसे प्रति खेप 7,000 रुपये देने का लालच देकर गांजा परिवहन के लिए तैयार किया। 3 मई को अखिलेश ने उसे एक ट्रॉली बैग में गांजा देकर पुणे पहुंचाने का निर्देश दिया। आरोपी विशाखा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 17015) के जनरल कोच में सवार होकर सिकंदराबाद पहुंचा, जहां 4 मई की सुबह करीब 8 बजे उतरने के बाद वह आगे के निर्देशों का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान दोपहर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई को रेलवे पुलिस के अधिकारियों ने आरपीएफ टीम के साथ मिलकर अंजाम दिया। पुलिस ने फरार आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

गांजा तस्करी में कितने साल की सजा होती है?

भारत में नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध NDPS Act 1985 के तहत आते हैं। सजा मात्रा (छोटी, मध्यम या व्यावसायिक) पर निर्भर करती है। छोटी मात्रा पर 1 साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है, जबकि बड़ी (कमर्शियल) मात्रा में 10 से 20 साल तक की कठोर सजा और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

गांजा में क्या धारा लगती है?

नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों में NDPS Act 1985 की विभिन्न धाराएं लगती हैं। आम तौर पर गांजा रखने, बेचने या तस्करी करने पर धारा 20 लागू होती है। मामले की प्रकृति के अनुसार अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं, जैसे तस्करी या साजिश से संबंधित प्रावधान।

गांजा मामला जमानती है या नहीं?

जमानत इस बात पर निर्भर करती है कि मामला किस श्रेणी का है। छोटी मात्रा के मामलों में जमानत मिल सकती है, लेकिन बड़ी या व्यावसायिक मात्रा के मामलों में जमानत मिलना बहुत कठिन होता है। NDPS Act 1985 के तहत सख्त प्रावधान हैं, इसलिए अदालत मामले की गंभीरता देखकर ही निर्णय लेती है।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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