वाशिंगटन । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका से एक बेहद गंभीर संकेत सामने आया है। अमेरिकी सैन्य गलियारों से छनकर आ रही जानकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ एक व्यापक और कई हफ्तों तक चलने वाली सैन्य कार्रवाई की योजना पर काम कर रही है। दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) हमला करने का अंतिम आदेश देते हैं, तो इस बार सेना केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक लंबे और निरंतर अभियान के लिए पूरी तरह तैयार है।
सीमित हमले से आगे बढ़ी अमेरिकी रणनीति
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अमेरिका (America) ने ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों पर सीमित हवाई हमले किए थे, जो एक त्वरित और एकबारगी कार्रवाई थी। लेकिन मौजूदा सैन्य गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि इस बार अमेरिकी योजना कहीं अधिक आक्रामक है। सूत्रों के अनुसार, संभावित हमले का दायरा केवल परमाणु ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईरान के सरकारी और सुरक्षा ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।
पेंटागन की तैयारी, मध्य पूर्व में बढ़ी सैन्य मौजूदगी
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन (Pentagan) ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया है। दुनिया के सबसे उन्नत विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को क्षेत्र में तैनात किया गया है। इसके साथ हजारों अतिरिक्त सैनिक, आधुनिक लड़ाकू विमान और मिसाइलों से लैस युद्धपोत भी भेजे जा रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी तैनाती एक लंबी और निर्णायक जंग की स्पष्ट तैयारी का संकेत है।

ट्रंप का सख्त संदेश, सभी विकल्प खुले
अपने हालिया संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौता आसान नहीं है और कई बार हालात को काबू में रखने के लिए सख्ती जरूरी होती है। व्हाइट हाउस की ओर से भी साफ किया गया है कि ईरान के खिलाफ सभी सैन्य विकल्प मेज पर मौजूद हैं और अंतिम फैसला राष्ट्रपति की रणनीति पर निर्भर करेगा।
ईरान की चेतावनी और क्षेत्रीय खतरा
इस संभावित कार्रवाई के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बनाएगा। इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलने की आशंका जताई जा रही है।
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कूटनीति बनाम युद्ध, निर्णायक होंगे आने वाले हफ्ते
एक ओर जहां सैन्य तैयारियां चरम पर हैं, वहीं ओमान में पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ईरान ने संकेत दिया है कि प्रतिबंध हटने की स्थिति में वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को तैयार है, लेकिन मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी समझौते से इनकार किया है। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह वैश्विक राजनीति और मध्य पूर्व की शांति के लिहाज से बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।
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