America: अमेरिका में कुदरत का कहर

By Dhanarekha | Updated: January 27, 2026 • 4:57 PM

बर्फीले तूफान से 30 मौतें, 7 लाख घरों में अंधेरा

वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के 20 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी(America) में फेडरल इमरजेंसी घोषित कर दी है। तूफान का असर 3,220 किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला है, जिससे लगभग 21 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। न्यूयॉर्क, टेनेसी और टेक्सास(Texas) जैसे राज्यों में अब तक 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई शहरों में 20 इंच तक बर्फ गिरने से सड़कें और हाईवे पूरी तरह ब्लॉक हो गए हैं, जिससे सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है

ब्लैकआउट और एविएशन संकट

बर्फीली बारिश और तूफान के कारण बिजली की लाइनें टूटने से 7 लाख से अधिक घर और व्यवसाय अंधेरे में डूबे हुए हैं। विशेषकर टेनेसी और लुइसियाना(America) में हालात इतने खराब हैं कि बिजली बहाल करने में हफ्तों का समय लग सकता है। वहीं, विमानन क्षेत्र (Aviation) में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है; सोमवार को ही 8,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं, जिससे लाखों यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए हैं।

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‘पोलर वोर्टेक्स’ और रिकॉर्ड तोड़ ठंड

इस भीषण ठंड की मुख्य वजह ‘पोलर वोर्टेक्स’ (ध्रुवीय भंवर) का दक्षिण की ओर खिसकना है। कनाडा सीमा के पास वॉटरटाउन(America) और कोपेनहेगन जैसे इलाकों में तापमान -45°C तक गिर गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आर्कटिक तूफान इतना हड्डियों को जकड़ने वाला है कि बाहर निकलने पर चंद मिनटों में फ्रॉस्टबाइट का खतरा हो सकता है। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने इसे “ऐतिहासिक और बेहद खतरनाक” करार देते हुए लोगों को घरों में ही रहने की सख्त हिदायत दी है।

‘पोलर वोर्टेक्स’ क्या है और यह अमेरिका में इतनी ठंड क्यों ला रहा है?

पोलर वोर्टेक्स उत्तरी ध्रुव के पास घूमने वाली ठंडी हवाओं का एक विशाल घेरा है। जब यह घेरा अस्थिर होकर दक्षिण(America) की ओर झुकता है, तो यह आर्कटिक की जमा देने वाली हवाओं को अमेरिका के मैदानी इलाकों तक ले आता है, जिससे तापमान अचानक रिकॉर्ड स्तर तक गिर जाता है।

राष्ट्रपति द्वारा ‘इमरजेंसी’ घोषित करने का क्या मतलब है?

इमरजेंसी घोषित होने के बाद संघीय एजेंसी FEMA को प्रभावित राज्यों में बचाव कार्य, मलबे की सफाई और आर्थिक मदद के लिए अतिरिक्त फंड और संसाधन जुटाने की कानूनी शक्ति मिल जाती है। इससे राज्य सरकारों को केंद्र से 75% तक वित्तीय सहायता मिलती है।

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