रक्षा बजट 10% करने की चुनौती
वाशिंगटन: नाटो(NATO) महासचिव मार्क रुट ने यूरोपीय संसद में स्पष्ट किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के 70 साल बाद भी यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी परमाणु सुरक्षा कवच और सैन्य शक्ति पर निर्भर है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यूरोप अमेरिका के बिना अकेले चलना चाहता है, तो उसे अपना रक्षा बजट जीडीपी (GDP) के 2% से बढ़ाकर 10% करना होगा और अपने स्वयं के परमाणु हथियार विकसित करने होंगे, जिसमें अरबों यूरो का खर्च आएगा। वर्तमान में नाटो के कुल खर्च में यूरोपीय देशों का योगदान केवल 30% है, जो सुरक्षा के लिहाज से काफी कम है।
ट्रंप की रणनीति और ग्रीनलैंड का मुद्दा
रुट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘आर्कटिक रक्षा रणनीति’ का समर्थन किया है। ट्रंप का मानना है कि रूस और चीन आर्कटिक क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ा रहे हैं, जो वैश्विक सुरक्षा(Global Security) के लिए खतरा है। हालांकि, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप और रुट के बीच हुई गुप्त बातचीत ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं को नाराज कर दिया है। ट्रंप(NATO) ने संकेत दिया है कि यदि यूरोपीय देश अपना रक्षा खर्च बढ़ाते हैं, तो वे ग्रीनलैंड और टैरिफ जैसे मुद्दों पर नरमी बरत सकते हैं, जैसा कि उन्होंने हाल ही में 10% टैरिफ हटाकर किया है।
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अमेरिका के बाहर होने का संभावित खतरा
यदि अमेरिका नाटो(NATO) से बाहर निकलता है, तो यूरोप को रसद, उपग्रह, खुफिया जानकारी और परमाणु प्रतिरोध के मामले में बड़ी कमी का सामना करना पड़ेगा। जहाँ रूस के पास 6000 परमाणु हथियार हैं, वहीं ब्रिटेन और फ्रांस के पास कुल मिलाकर केवल 500 हैं। इसके अतिरिक्त, जर्मनी, पोलैंड और ब्रिटेन में तैनात 10 लाख अमेरिकी सैनिक यूरोप के लिए सुरक्षा की मुख्य दीवार हैं। स्पेन जैसे देशों ने पहले ही बजट बढ़ाने में असमर्थता जताई है, जिससे यह साफ है कि अमेरिका के बिना यूरोप का सैन्य ढांचा ढह सकता है।
नाटो का ‘अनुच्छेद 5’ क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अनुच्छेद 5 का सिद्धांत है “एक पर हमला, सभी पर हमला।” इसके तहत यदि किसी एक नाटो(NATO) देश पर हमला होता है, तो सभी सदस्य देश मिलकर उसका जवाब देते हैं। यह मुख्य रूप से छोटे यूरोपीय देशों को रूस जैसी बड़ी शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
डोनाल्ड ट्रंप नाटो देशों से क्यों नाराज रहते हैं?
ट्रंप का मानना है कि अमेरिका नाटो का सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ उठा रहा है, जबकि यूरोपीय देश अपनी जीडीपी का पर्याप्त हिस्सा (कम से कम 2-5%) रक्षा पर खर्च नहीं कर रहे हैं। वे इसे अमेरिका के साथ अन्यायपूर्ण मानते हैं और कई बार नाटो छोड़ने की धमकी दे चुके हैं।
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