वॉशिंगटन । अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच व्हाइट हाउस (White House) ने बड़ा दावा किया है। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के शुरुआती 10 सूत्रीय प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए कूड़ेदान में फेंक दिया था, क्योंकि वह अमेरिकी हितों के खिलाफ और गंभीर नहीं था।
‘गंभीर नहीं था ईरान का प्रस्ताव’
लेविट ने स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा दिया गया शुरुआती मसौदा अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं था। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन किसी भी ऐसे प्रस्ताव पर विचार नहीं करेगा, जो देश की सुरक्षा और हितों के खिलाफ हो।
नया प्रस्ताव बना बातचीत का आधार
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि बाद में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuzz Strait) को खोलने पर सहमति जताई और एक नया प्रस्ताव सामने आया है। इस नए मसौदे को बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार माना जा रहा है।
विपक्ष और मीडिया को दी नसीहत
लेविट ने मीडिया और विपक्षी नेताओं से अपील की कि वे भ्रामक खबरों को बढ़ावा न दें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी ईरान की शर्तों के आगे झुकने वाले नहीं हैं और कोई भी समझौता केवल अमेरिकी हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा।
ट्रंप पर विपक्ष का तीखा हमला
इस मुद्दे पर अमेरिकी राजनीति भी गरमा गई है। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए उन्हें पद के लिए मानसिक रूप से अयोग्य बताया और उनके फैसलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को ट्रंप का “सरेंडर” करार दिया।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर फिर तनाव
इधर, ईरान ने पहले होर्मुज स्ट्रेट खोलने के संकेत दिए, लेकिन कुछ ही घंटों में अपना फैसला बदलते हुए इसे फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया। इस कदम ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और अमेरिका की कूटनीति के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
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मध्य-पूर्व संकट के बीच बढ़ी चुनौतियां
ईरान-इजरायल और लेबनान में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन पर दबाव भी बढ़ रहा है कि वह क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए संतुलित और प्रभावी कदम उठाए।
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