दुबई/नई दिल्ली। Israel और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब पूरे मिडिल ईस्ट में दिखाई देने लगा है। दुबई में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत (Burj Khalifa) के पास ड्रोन हमले की खबर के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। एहतियातन बुर्ज खलीफा को खाली करा दिया गया और उसकी रोशनी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई।
दुबई के दोनों प्रमुख एयरपोर्ट बंद
हमले के बाद (Dubai International Airport) और Al Maktoum International Airport पर उड़ानों का संचालन अगले आदेश तक रोक दिया गया। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सुरक्षा कारणों से कई उड़ानों को डायवर्ट किया, जबकि सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द या स्थगित कर दी गईं। कई देशों ने एहतियातन अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया, जिससे एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच हवाई यातायात पर व्यापक असर पड़ा।
एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द
Air India ने घोषणा की है कि 1 मार्च को लंदन, टोरंटो, फ्रैंकफर्ट, पेरिस और शिकागो के लिए उसकी सभी निर्धारित उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है।Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने भी भारतीय एयरलाइंस को 11 देशों के एयरस्पेस से बचने की सलाह दी है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस अवश्य जांच लें।
पैसेंजर्स के लिए एडवाइजरी जारी
दुबई के दोनों अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट ऑपरेशन अगले नोटिस तक स्थगित कर दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्री बिना पुष्टि के एयरपोर्ट न पहुंचें और ताजा शेड्यूल के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें। United Arab Emirates, Qatar, Bahrain और Kuwait ने भी कुछ समय के लिए अपने एयरस्पेस बंद किए थे, जिससे एयरलाइंस को उड़ानें रीरूट या सस्पेंड करनी पड़ीं।
हवा में पांच घंटे, फिर लौटनी पड़ी फ्लाइट
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के अनुसार, एक बोइंग 777 विमान पांच घंटे से अधिक समय तक हवा में रहा। जब विमान सऊदी अरब के एयरस्पेस में पहुंचा, तो सुरक्षा कारणों से उसे वापस लौटने का निर्णय लिया गया। एयर इंडिया ने इस अचानक बदली स्थिति के कारण यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताया है।
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अन्य एयरलाइंस भी अलर्ट पर
IndiGo ने भी बयान जारी कर कहा कि वह ईरान और उससे जुड़े एयरस्पेस में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अपने परिचालन में बदलाव करेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव लंबा खिंचता है, तो वैश्विक उड्डयन और तेल बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की अपील की है।
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