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Bangladesh: बांग्लादेश चुनाव: क्या सत्ता की चाबी थामेगी जमात-ए-इस्लामी?

Dhanarekha
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Bangladesh: बांग्लादेश चुनाव: क्या सत्ता की चाबी थामेगी जमात-ए-इस्लामी?

ढाका: बांग्लादेश(Bangladesh) में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। हालिया सर्वे चौंकाने वाले परिणाम दिखा रहे हैं, जिनमें कट्टरपंथी पार्टी ‘जमात-ए-इस्लामी’ देश की दूसरी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। लंबे समय तक प्रतिबंधों(Sanctions) और हाशिए पर रहने वाली यह पार्टी अब किंगमेकर या सरकार बनाने की भूमिका में नजर आ रही है। अवामी लीग के पतन के बाद पैदा हुए राजनीतिक शून्य को जमात अपने ‘इस्लाम ही समाधान है’ के नारे से भरने की कोशिश कर रही है

सर्वे के नतीजे और राजनीतिक समीकरण

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय सर्वे, जैसे इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI), यह संकेत दे रहे हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी BNP (34.7%) और जमात-ए-इस्लामी (33.6%) के बीच कांटे की टक्कर है। शेख हसीना(Bangladesh) की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगने के बाद, जमात ने खुद को एक नैतिक और भ्रष्टाचार विरोधी विकल्प के रूप में पेश किया है। जमात ने इस बार 179 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का साहसिक फैसला लिया है, जो उनकी बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

जमात का विवादास्पद अतीत और बदलती रणनीति

जमात-ए-इस्लामी का इतिहास भारत और बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के समर्थकों के लिए चिंता का विषय रहा है। 1971 में इस पार्टी ने बांग्लादेश की आजादी का विरोध कर पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। हालांकि, अब पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान का दावा है कि वे टकराव की राजनीति छोड़कर जनसेवा पर ध्यान दे रहे हैं। युवाओं को लुभाने के लिए पार्टी डिजिटल प्लेटफॉर्म और वायरल गीतों का सहारा ले रही है, लेकिन हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले और महिलाओं को टिकट न देने जैसे मुद्दों ने मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।

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भारत-बांग्लादेश संबंधों पर संभावित असर

बांग्लादेश(Bangladesh) की सत्ता में जमात की संभावित वापसी भारत के लिए रणनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आई है। भारत ने हाल ही में बांग्लादेश को ‘नॉन-फैमिली’ पोस्टिंग वाले देशों की श्रेणी में डाल दिया है, जिसका अर्थ है कि वहां तैनात भारतीय राजनयिक अपने परिवार को साथ नहीं रख पाएंगे। यदि पाकिस्तान समर्थक विचारधारा वाली पार्टी सत्ता में आती है, तो दक्षिण एशिया के सुरक्षा समीकरण और द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्ते और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।

जमात-ए-इस्लामी का चुनाव चिह्न क्या है और वह युवाओं को कैसे प्रभावित कर रही है?

जमात-ए-इस्लामी का चुनाव चिह्न ‘तराजू’ है। पार्टी 13 करोड़ इंटरनेट यूजर्स वाले बांग्लादेश में सोशल मीडिया रणनीतियों, पेशेवर एजेंसियों और वायरल चुनावी गीतों के जरिए युवा वोटरों तक अपनी पहुंच बना रही है।

बांग्लादेश की संसद संरचना भारत से किस प्रकार भिन्न है?

भारत में लोकसभा और राज्यसभा(Bangladesh) दो सदन होते हैं, जबकि बांग्लादेश की संसद (जातीय संसद) में केवल एक ही सदन है। इसमें कुल 350 सीटें हैं, जिनमें से 300 पर सीधे चुनाव होते हैं और 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

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