ब्रुसेल्स: यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास के अनुसार, यह नया सुरक्षा(Defence) समझौता आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में मील का पत्थर साबित होगा। इस साझेदारी के तहत भारत और EU समुद्री सुरक्षा (Maritime Security), साइबर सुरक्षा और काउंटर-टेररिज्म जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खुफिया जानकारी और तकनीक साझा करेंगे। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में EU के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी इस रणनीतिक गहराई को और स्पष्ट करती है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और आर्थिक मजबूती
रक्षा के साथ-साथ, दोनों पक्ष दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक(Defence) को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-EU व्यापार पहले ही $135 बिलियन तक पहुंच चुका है। FTA लागू होने से दवा, सेमीकंडक्टर और तकनीक के क्षेत्र में निर्यात की बाधाएं कम होंगी। हालांकि, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे कुछ मुद्दों पर बातचीत अभी जारी है, ताकि स्टील और सीमेंट जैसे उत्पादों पर लगने वाले अतिरिक्त टैक्स का समाधान निकाला जा सके।
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चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ के लिए भारत के साथ यह नजदीकी ‘चीन प्लस वन’ रणनीति का हिस्सा है। यूरोप अपनी आपूर्ति श्रृंखला(Defence) के लिए चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है और भारत को एक भरोसेमंद लोकतांत्रिक भागीदार के रूप में देखता है। इसके अलावा, छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल कामगारों की आसान आवाजाही के लिए भी समझौते किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में दोनों क्षेत्रों के बीच ‘टैलेंट कॉरिडोर’ मजबूत होगा।
भारत-EU शिखर सम्मेलन कब होगा और इसमें कौन से मुख्य नेता शामिल होंगे?
शिखर सम्मेलन 27 जनवरी को नई दिल्ली में होगा। इसमें यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शामिल होंगी। ये नेता 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी होंगे।
CBAM क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) यूरोपीय संघ का एक नियम है जो उन उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगाता है जिन्हें बनाने में अधिक प्रदूषण हुआ हो। भारत(Defence) के स्टील और सीमेंट निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, इसलिए दोनों देश इस पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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