तेल अवीव/तेहरान: ब्रिटेन और ईरान के बीच तनाव उस समय चरम(Drone Attack) पर पहुँच गया जब साइप्रस स्थित अक्रोटिरी (Akrotiri) ब्रिटिश मिलिट्री बेस पर संदिग्ध ईरानी ड्रोन से हमला किया गया। यह हमला उस समय हुआ जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिका को ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमले के लिए इस बेस के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। वर्तमान में ब्रिटिश सेना इस हमले के स्रोत की जांच कर रही है और जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है। यह घटना दर्शाती है कि युद्ध अब केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भूमध्यसागरीय क्षेत्रों तक फैल रहा है।
कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट्स की दुर्घटना
युद्ध के मोर्चे से एक और बड़ी खबर कुवैत से आई है, जहाँ अमेरिका के कई फाइटर जेट्स क्रैश हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जेट हवा में अनियंत्रित होकर घूमने लगे(Drone Attack) और जमीन से टकरा गए। गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई है। हालांकि, इन विमानों के क्रैश होने के पीछे तकनीकी खराबी है या कोई बाहरी हस्तक्षेप, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान इस समय अमेरिका(America) के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत के पक्ष में नहीं है।
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ईरान में भारी तबाही और मानवीय संकट
पिछले 72 घंटों में अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के 1000 से अधिक ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 2000 से ज्यादा बम गिराए जा चुके हैं, जिसमें 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे हृदयविदारक घटना(Drone Attack) एक स्कूल पर मिसाइल गिरने की रही, जिसमें 180 छात्राओं की जान चली गई। 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से हिंसा और प्रतिशोध का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है।
साइप्रस का अक्रोटिरी बेस इस युद्ध में इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
साइप्रस में स्थित अक्रोटिरी बेस ब्रिटेन का एक रणनीतिक सैन्य ठिकाना है। इसकी भौगोलिक स्थिति मध्य-पूर्व के करीब है, जिससे अमेरिका और ब्रिटेन के लिए ईरानी मिसाइल ठिकानों पर हवाई हमला करना आसान हो जाता है। यही कारण है कि ईरान ने इसे सीधे तौर पर निशाना बनाया है।
ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत की खबरों को क्यों खारिज कर दिया?
ईरान के शीर्ष अधिकारी अली लारीजानी ने बातचीत से इनकार किया है क्योंकि उनका मानना है कि वर्तमान सैन्य हमलों के बीच कूटनीति की कोई जगह नहीं है। सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान में भारी आक्रोश है, और वे इसे बातचीत के बजाय प्रतिशोध (Revenge) के समय के रूप में देख रहे हैं।
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