तालिबान का एयरबेस पर हमला और पाकिस्तान का ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन
इस्लामाबाद/ काबुल: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अब पूर्ण युद्ध(Durand Line) की स्थिति में बदल गया है। तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने रावलपिंडी(Rawapindi) स्थित पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया है। तालिबान के मंत्रियों के अनुसार, अफगान लड़ाकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित डूरंड लाइन को पार कर लिया है और वे क्वेटा तथा खैबर पख्तूनख्वा के सैन्य ठिकानों में घुस चुके हैं। यह तालिबान की ओर से अब तक की सबसे बड़ी सीधी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है।
पाकिस्तान का ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन और भारी नुकसान
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान(Afghanistan) के हमलों का जवाब देने के लिए ‘गजब लिल हक’ नामक सैन्य अभियान शुरू किया है। पाकिस्तानी सरकार का दावा है कि इस ऑपरेशन(Durand Line) में अब तक 415 तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और 180 से अधिक सैन्य चौकियां तबाह कर दी गई हैं। पाकिस्तानी वायुसेना ने नंगरहार और कंधार में तालिबान के मुख्यालयों पर भीषण बमबारी की है। हालांकि, तालिबान इन आंकड़ों को खारिज करते हुए अपने केवल 8 से 13 लड़ाकों के मारे जाने की बात कह रहा है और बदले में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर करने का दावा किया है।
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डूरंड लाइन विवाद और टीटीपी (TTP) का मुद्दा
इस संघर्ष की जड़ में डूरंड लाइन का पुराना सीमा विवाद और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का मुद्दा है। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान सरकार(Durand Line) अपनी जमीन का इस्तेमाल टीटीपी के आतंकियों को शरण देने के लिए कर रही है, जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। वहीं, तालिबान इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है। 2021 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध निचले स्तर पर हैं, जो अब एक गंभीर क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन रहे हैं।
डूरंड लाइन क्या है और यह विवाद का कारण क्यों है?
डूरंड लाइन 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगान अमीर के बीच तय की गई 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा है। अफगानिस्तान इस सीमा को कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं करता क्योंकि यह पश्तून समुदायों को दो हिस्सों में बांटती है। यही कारण है कि सीमा पर अक्सर बाड़ लगाने या चौकियों को लेकर संघर्ष होता रहता है।
पाकिस्तान के ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान के भीतर सक्रिय टीटीपी (TTP) के ठिकानों को नष्ट करना और तालिबान के हमलों का कड़ा जवाब देना है। पाकिस्तान इसके जरिए तालिबान सरकार पर दबाव बनाना चाहता है कि वह अपनी सीमा के भीतर से होने वाली आतंकी गतिविधियों को रोके।
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