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H-1B Visa: ट्रंप प्रशासन का H-1B वीजा पर कड़ा रुख

Dhanarekha
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H-1B Visa: ट्रंप प्रशासन का H-1B वीजा पर कड़ा रुख

फ्लोरिडा के गवर्नर ने बताया ‘स्कैम’, भारतीयों पर होगा सीधा असर

वॉशिंगटन: अमेरिका में वीजा नियमों पर सख्ती बढ़ रही है, जिसका सीधा असर भारतीय पेशेवरों (Indian Professionals) और छात्रों पर पड़ सकता है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वर्क वीजा (H-1B Visa) और छात्र वीजा (F और J) की अवधि को सीमित करने की तैयारी की है।

वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और फ्लोरिडा(Florida) के गवर्नर रॉन डेसेंटिस ने H-1B वीजा(H-1B Visa) को “घोटाला” बताया है। उनका आरोप है कि इस वीजा का दुरुपयोग अमेरिकी नौकरियों को छीन रहा है, जबकि इसका सबसे ज्यादा फायदा भारतीयों को मिल रहा है

H-1B वीजा और भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव

अमेरिका द्वारा जारी किए जाने वाले लगभग 75% H-1B वीजा(H-1B Visa) भारतीयों को मिलते हैं। भारत से हर साल लाखों इंजीनियर और कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स अमेरिका की तकनीकी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और कॉग्निजेंट जैसी बड़ी भारतीय आईटी कंपनियाँ सबसे ज्यादा H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं।

ट्रंप प्रशासन के अनुसार, मौजूदा H-1B सिस्टम एक स्कैम है क्योंकि यह औसत अमेरिकी सैलरी (75,000 डॉलर) से कम कमाने वाले विदेशी कर्मचारियों (औसतन 66,000 डॉलर) को नौकरी दे रहा है, जिससे अमेरिका को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

छात्र और पत्रकार वीजा पर भी सख्ती

ट्रंप प्रशासन ने छात्र वीजा (F वीजा) और एक्सचेंज वीजा (J वीजा) को लेकर भी कड़े नियम बनाए हैं। पहले, इन वीजा पर रहने की अवधि तब तक थी जब तक कि छात्र की पढ़ाई जारी रहती थी। लेकिन नए नियमों के अनुसार, F और J वीजा की अधिकतम वैधता 4 साल तक सीमित कर दी गई है।

यदि कोई छात्र या कार्यक्रम इससे लंबा है, तो उसे वीजा विस्तार के लिए अलग से आवेदन करना होगा। इसी तरह, विदेशी पत्रकारों (I वीजा) की अवधि 240 दिन तय की जाएगी, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों का तर्क और ‘गोल्ड कार्ड’ का प्रस्ताव

H-1B Visa

वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया है कि मौजूदा वीजा सिस्टम को बदला जाएगा ताकि अमेरिका केवल ‘टॉप टैलेंट’ को ही आकर्षित करे। उन्होंने H-1B और ग्रीन कार्ड सिस्टम को बदलने और एक नया “गोल्ड कार्ड” लाने का प्रस्ताव रखा है।

फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस ने आरोप लगाया कि कई कंपनियाँ अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर H-1B वीजा धारकों को काम पर रख रही हैं, और यह दावा कि H-1B से दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट आता है, गलत है। इन सख्त नियमों का उद्देश्य वीजा धारकों की बेहतर निगरानी करना और दुरुपयोग रोकना बताया जा रहा है।

ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा को “स्कैम” क्यों मान रहा है?

प्रशासन का मानना ​​है कि मौजूदा H-1B वीजा सिस्टम एक “घोटाला” है क्योंकि यह विदेशी श्रमिकों को उन नौकरियों को भरने की अनुमति देता है जो अमेरिकियों को मिलनी चाहिए। वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के अनुसार, H-1B वीजा धारकों की औसत कमाई (66,000 डॉलर) औसत अमेरिकी सैलरी (75,000 डॉलर) से कम है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस ने आरोप लगाया है कि कई कंपनियाँ लागत बचाने के लिए अमेरिकी कर्मचारियों की जगह H-1B कर्मचारियों को काम पर रख रही हैं।

प्रशासन द्वारा प्रस्तावित ‘गोल्ड कार्ड’ क्या है?

ट्रंप प्रशासन ‘ग्रीन कार्ड’ सिस्टम में बदलाव करके उसकी जगह एक नया ‘गोल्ड कार्ड’ लाने का प्रस्ताव रख रहा है। इस ‘गोल्ड कार्ड’ का उद्देश्य दुनिया भर से ‘टॉप टैलेंट’ और समृद्ध निवेशकों को अमेरिका की ओर आकर्षित करना है। मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के अनुसार, यह नया सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिका में केवल सबसे कुशल और सबसे योग्य लोग ही प्रवेश करें।

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