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Houthi Rebel: हूती विद्रोहियों की चुप्पी: रणनीति या मजबूरी?

Dhanarekha
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Houthi Rebel: हूती विद्रोहियों की चुप्पी: रणनीति या मजबूरी?

इजराइल और अमेरिका के सीधे हमले का डर

तेहरान: पिछले साल अगस्त में इजराइल द्वारा यमन में किए गए हवाई हमलों(Houthi Rebel) में हूती सरकार के कई शीर्ष नेताओं, जिनमें प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ भी शामिल थे, की मौत हुई थी। इस बड़े नुकसान ने हूती नेतृत्व को बैकफुट पर धकेल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में हूतियों की प्राथमिकता अपने नियंत्रण वाले इलाकों और नेतृत्व को इजराइल(Israel) और अमेरिका की सटीक खुफिया कार्रवाई और हवाई हमलों से बचाना है। वे किसी भी ऐसे बड़े कदम से बचना चाहते हैं जो उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन जाए

ईरान की ‘बैकअप’ रणनीति

विश्लेषकों के अनुसार, ईरान फिलहाल हूती विद्रोहियों को एक ‘स्ट्रेटेजिक एसेट’ (रणनीतिक संपत्ति) के रूप में बचाकर रखना चाहता है। तेहरान अपने सभी विकल्प एक साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहता। यमनी राजनीतिक विश्लेषक सदाम अल-हुरैबी(Houthi Rebel) का मानना है कि यदि ईरान सीधे तौर पर हूतियों से मदद मांगता है, तो वे निश्चित रूप से युद्ध में शामिल हो सकते हैं। हूतियों के पास अभी भी ड्रोन(Drone) और मिसाइलों के जरिए रेड सी में हलचल मचाने और इजराइल व अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की पूरी क्षमता मौजूद है।

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हथियारों की आपूर्ति पर भविष्य का संकट

हूती विद्रोहियों की ताकत काफी हद तक ईरान से मिलने वाली सैन्य मदद और हथियारों की तस्करी पर निर्भर है। यदि वर्तमान जंग में ईरान कमजोर पड़ता है या उसका शासन(Houthi Rebel) प्रभावित होता है, तो यमन तक पहुंचने वाली हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला ठप हो सकती है। हूती विद्रोही इस बात से पूरी तरह वाकिफ हैं कि उनके भविष्य का अस्तित्व ईरानी सहयोग से जुड़ा है, इसलिए वे बहुत सोच-समझकर और समय की नजाकत को देखते हुए ही कोई बड़ा सैन्य फैसला लेंगे।

हूती विद्रोही अभी तक इस जंग में सक्रिय रूप से शामिल क्यों नहीं हुए हैं?

इन विद्रोहियों को डर है कि यदि वे सीधा टकराव करते हैं, तो अमेरिका और इजराइल उनके नेतृत्व और ठिकानों पर भारी हवाई हमले करेंगे। पिछले साल इजराइली हमलों में अपने कई वरिष्ठ नेताओं को खोने के बाद वे अब काफी सतर्क हैं और खुद को सीधे जवाबी कार्रवाई से बचाना चाहते हैं।

हूती विद्रोहियों के लिए ईरान का कमजोर पड़ना क्यों चिंता का विषय है?

हूती विद्रोही हथियारों के लिए काफी हद तक ईरान पर निर्भर हैं। यदि ईरान युद्ध के कारण कमजोर पड़ता है, तो यमन तक हथियारों की तस्करी और ईरानी सहायता कम या बंद हो सकती है, जो हूतियों की सैन्य क्षमता के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।

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