India EU FTA : भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रही मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताएं एक अहम चरण में पहुंच गई हैं। वर्ष 2007 में शुरू हुई यह प्रक्रिया करीब 19 साल के लंबे इंतज़ार के बाद अब निर्णायक मोड़ पर है। अगर यह समझौता लागू होता है, तो रक्षा से लेकर रोजगार तक कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
यह एफटीए सिर्फ वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा देगा। यूरोपीय देशों से उन्नत रक्षा तकनीक भारत को मिलने से ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठेगा।
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समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वर्कर मोबिलिटी है। (India EU FTA) आईटी, इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोप में रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। वीज़ा प्रक्रिया में आसानी और कार्य परमिट में लचीलापन भारतीय युवाओं के लिए यूरोप के दरवाज़े खोल सकता है।
टैरिफ, डेटा गोपनीयता और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर मतभेदों के कारण 2013 में वार्ताएं रुक गई थीं। लेकिन 2021 के बाद दोनों पक्षों ने फिर से बातचीत को तेज़ किया। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में चीन पर निर्भरता कम करने की यूरोपीय रणनीति भारत के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता लागू होने पर भारत–ईयू के बीच द्विपक्षीय व्यापार सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
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