नमल राजपक्षे की बड़ी अपील
काेलंबाे: श्रीलंका के सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे ने भारत(India) से दक्षिण एशिया में एक प्रभावी नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर साझा किया कि क्षेत्र में साझा सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता को दूर करने के लिए भारत का मार्गदर्शन(Guidance) अनिवार्य है। नमल के अनुसार, वर्तमान वैश्विक सुरक्षा हालातों को देखते हुए दक्षिण एशियाई देशों के बीच मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, ताकि किसी भी संकट का मिलकर मुकाबला किया जा सके।
चरमपंथ और राजनीतिक हिंसा पर जताई चिंता
नमल राजपक्षे ने विशेष रूप से बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में हाल के वर्षों में हुई राजनीतिक उथल-पुथल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अक्सर जनता के असंतोष का फायदा उठाकर चरमपंथी तत्व लोकतांत्रिक(Democratic) सरकारों को अस्थिर करते हैं। उन्होंने जोर(India) दिया कि दक्षिण एशिया को उग्रवाद का मुकाबला करने, राजनीतिक हिंसा रोकने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक सामूहिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। उनके अनुसार, क्षेत्र की एकता ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर दक्षिण एशिया के प्रभाव को बढ़ा सकती है।
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पड़ोसी देशों में सत्ता परिवर्तन और भविष्य की उम्मीद
पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण राजपक्षे परिवार को सत्ता गंवानी पड़ी, वहीं बांग्लादेश में शेख हसीना और नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकारों को जन-विद्रोह के कारण इस्तीफा देना पड़ा। नमल राजपक्षे(India) ने इन घटनाओं को क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक बड़ा सबक बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले आगामी चुनाव (अप्रैल 2026) लोकतांत्रिक वैधता की पुष्टि करेंगे, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
नमल राजपक्षे ने भारत के नेतृत्व को दक्षिण एशिया के लिए क्यों जरूरी बताया है?
नमल राजपक्षे का मानना है कि दक्षिण एशिया वर्तमान में राजनीतिक(India) अस्थिरता, चरमपंथ और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। इन साझा समस्याओं के समाधान और क्षेत्र में लंबे समय तक शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत का प्रभाव, अनुभव और नेतृत्व सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
हाल के वर्षों में श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में सत्ता परिवर्तन के मुख्य कारण क्या रहे?
इन तीनों देशों में बड़े पैमाने पर जनता का असंतोष, आर्थिक कुप्रबंधन और विरोध प्रदर्शन मुख्य कारण रहे। श्रीलंका (2022) में आर्थिक संकट, बांग्लादेश (2024-25) में हिंसक आंदोलन और नेपाल (2025) में ‘जेन-जी विद्रोह’ के कारण वहां की सरकारों को सत्ता छोड़नी पड़ी।
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