IRAN- ईरान ने किया कुवैती तेल टैंकर पर हमला, फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज फंसे

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ईरान
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नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को ईरान (Iran) ने दुबई बंदरगाह के पास लंगर डाले एक पूरी तरह से भरे कच्चे तेल के टैंकर पर हमला किया। इस हमले के बाद टैंकर में आग लगी और उसके बाहरी हिस्से को गंभीर नुकसान पहुंचा। कुवैत की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प के हवाले से बताया कि कंपनी ने तेल फैलने की आशंका की चेतावनी भी दी है। यह घटना खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों की एक नई कड़ी है, जिसमें मिसाइलों और विस्फोटक हवाई तथा समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया गया

सरकारी तेल कंपनी ने दी चेतावनी

समाचार एजेंसी कूना ने कुवैत की सरकारी तेल कंपनी के हवाले से बताया कि “यूएई में दुबई पोर्ट (Dubai Port) के एंकरेज एरिया में मौजूद कुवैत के एक विशाल कच्चे तेल के टैंकर पर ईरान ने सीधा और दुर्भावनापूर्ण हमला किया।” कंपनी ने स्थानीय जलक्षेत्र में तेल फैलने की संभावना के मद्देनज़र सतर्क रहने का आह्वान किया। दुबई के अधिकारियों ने कहा कि वे समुद्री ड्रोन द्वारा किए गए इस हमले का सामना कर रहे हैं और अग्निशमन दल जहाज पर लगी आग को बुझाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

जहाज के पास गिरीं दो मिसाइलें

अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और चालक दल के सभी 24 सदस्य सुरक्षित हैं। ईरान ने अभी तक इस हमले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रॉयटर्स ने लाइबेरिया के झंडे वाले जहाज ‘एक्सप्रेस रोम’ के एक प्रतिनिधि के हवाले से बताया कि 1352 GMT पर रास तनुरा से लगभग 22 नॉटिकल मील (लगभग 41 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में कंटेनर जहाज के पास पानी में दो अज्ञात मिसाइलें गिरीं।

मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों पर किया 19 हमलों का दावा

मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। इराक के हथियारबंद संगठन इस्लामिक रेसिस्टेंस इन इराक ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिकी ठिकानों पर 19 अलग-अलग हमले किए। संगठन ने कहा कि इन हमलों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

मिलिशिया ने किए हमलों का खुलासा

संगठन ने अपने बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने इराक और क्षेत्र के अन्य हिस्सों में स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाकर ये ऑपरेशन अंजाम दिए। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति लगातार खराब हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की इन गतिविधियों से इराक में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और उनके लॉजिस्टिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी ठिकानों पर ऐसे हमले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र और मध्य पूर्व में स्थिरता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का संकेत है। पिछले कुछ महीनों में इसी तरह के हमलों की श्रृंखला ने समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस तरह के हमले जारी रहे तो वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ सकते हैं।

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Anuj Kumar

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