नई दिल्ली। लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार को नक्सलवाद के मुद्दे पर हुई चर्चा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि “जो हथियार उठाएगा, उसे हिसाब देना होगा।” उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में अब नक्सलवाद (Naxalwad) लगभग समाप्ति की ओर है और वहां विकास की नई धारा बह रही है।
विकास कार्यों का ज़िक्र
अमित शाह ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल, राशन की दुकानों और गैस चूल्हों जैसी योजनाओं ने आम लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले नक्सलवाद का समर्थन करने वाले इन बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों प्रयास नहीं करते थे।
नक्सलवाद के नुकसान
शाह ने कहा कि इस हिंसा में लगभग 20 हजार युवाओं की जान गई और कई लोग दिव्यांग हो गए। उन्होंने नक्सलवाद को केवल विकास की कमी का परिणाम मानने से इनकार किया और इसे विचारधारा से प्रेरित समस्या बताया।
समयसीमा तय
केंद्रीय मंत्री ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च की समयसीमा का उल्लेख किया और कहा कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
संसदीय चर्चा
लोकसभा में नियम 193 के तहत चर्चा की शुरुआत शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) (Eknath Shinde) के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने की थी। अमित शाह के बयान के बाद नक्सलवाद पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।
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