तेहरान के अस्पतालों में लाशों का ढेर, 217 मौतों का दावा
तेहरान: तेहरान के एक डॉक्टर ने ‘टाइम मैगजीन’ के हवाले से दावा(Iran) किया है कि राजधानी के केवल छह अस्पतालों में 217 प्रदर्शनकारियों के शव पहुंचे हैं, जिनमें से अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई है। शुक्रवार को प्रदर्शनों के और उग्र होने के बाद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने खुली चेतावनी दी है कि माता-पिता अपने बच्चों को सड़कों से दूर रखें। सेना का कड़ा संदेश है कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी को गोली लगती है, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की नहीं होगी। तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आगजनी की घटनाओं ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
आर्थिक बदहाली और ‘Gen Z’ का आक्रोश
इस विद्रोह की मुख्य जड़ ईरान(Iran) की चरमराती अर्थव्यवस्था है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ डॉलर के मुकाबले 14.5 लाख के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गई। खाने-पीने की चीजों में 72% और दवाओं में 50% की महंगाई ने आम जनता, विशेषकर युवाओं (Gen Z) को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। सरकार द्वारा बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने जलती आग में घी का काम किया है। प्रदर्शनकारी अब केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि “तानाशाह मुर्दाबाद” के नारों के साथ सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं।
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वैश्विक तनाव और क्राउन प्रिंस की वापसी का ऐलान
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को अमेरिका और इजराइल की साजिश करार दिया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर नागरिकों का कत्लेआम नहीं रुका, तो अमेरिका सख्त सैन्य कदम उठा सकता है। इस बीच, 50 साल से निर्वासन में रह रहे ईरान(Iran) के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने घोषणा की है कि वह “राष्ट्रीय क्रांति” में शामिल होने के लिए जल्द ही स्वदेश लौटेंगे। पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप कर दी गई हैं, जिससे सटीक जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गया है।
वर्तमान ईरानी प्रदर्शनों का मुख्य कारण क्या है?
इन प्रदर्शनों का प्राथमिक कारण ईरान(Iran) का गंभीर आर्थिक संकट है। ईरानी रियाल का मूल्य गिरकर ऐतिहासिक रूप से कम हो गया है, जिससे खाने और दवाओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। साथ ही, भ्रष्टाचार और सत्ता के कड़े नियमों के खिलाफ लंबे समय से जमा आक्रोश अब विद्रोह में बदल गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संकट का क्या प्रभाव पड़ रहा है?
अमेरिका और इजराइल ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, जबकि ईरान ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी और रजा पहलवी के वापसी के ऐलान ने ईरान के आंतरिक संकट को एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक युद्ध में बदल दिया है।अन्य पढ़े:
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